भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने अपनी टीम की घोषणा कर दी है। एससी मोर्चा, किसान मोर्चा और एसटी मोर्चा के अध्यक्ष भी तय कर दिए गए, लेकिन एक और महत्वपूर्ण मोर्चा जिसे पार्टी की युवा विंग कहा जाता है, उसका गठन नहीं किया गया, वो है भारतीय जनता युवा मोर्चा। इस मोर्चे को लेकर लगातार मंथन का दौर जारी है, क्योंकि इसमें नया पेंच आ गया है, वो है क्या अबकी बार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अध्यक्ष बनाया जाए या फिर पुराने युवा मोर्चा में काम करने वाले नेताओं को तरजीह दी जाए। पार्टी हाईकमान आने वाले वक्त की चुनौतियों को ध्यान में रखकर अभी एक ऐसा चेहरा देने की कोशिश में लगा है कि जोकि युवाओं को एकजुट और पार्टी के पक्ष में लाने का काम करे।
क्या रहेगा क्राइटेरिया
पार्टी सूत्रों के मुताबिक भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष और उसके गठन को लेकर साफ हो गया है कि अबकी बार युवा मोर्चा का अध्यक्ष सामान्य वर्ग से बनाया जाएगा, क्योंकि पिछली बार वैभव पंवार के रुप में ओबीसी वर्ग को मौका दिया गया था। वहीं यह जानकारी मिलने के बाद एक-दो नाम को छोड़कर अन्य वर्ग के नेताओं ने अपनी दावेदारी वापस ले ली है। बात करें क्राइटेरिया की तो संघ पृष्ठभूमि, साफ सुथरी छवि, अच्छी भाषण शैली, युवाओं के बीच पैठ बनाने में माहिर, गुटबाजी से दूर रहकर संगठन को खड़ा करने वाला, विपक्षी दलों का जवाब देने में काबिल और सोशल मीडिया का सही तरीके से उपयोग करने वाला तो यह वो गुण है, जिनको ध्यान में रखकर बीजेपी अपना अगला युवा मोर्चा का अध्यक्ष चुनने वाली है।
बीजेपी के आला नेताओं ने दिए नाम
भाजपा में युवा मोर्चा का पद बेहद ही अहम माना जाता है, इसीलिये बीजेपी के आला नेता भी चाह रहे हैं कि अबकी बार उनकी पसंद का युवा चेहरा ही इस कुर्सी पर काबिज हो। कहा जा रहा है कि इस पद के लिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, सीएम डॉ. मोहन यादव, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने अपनी-अपनी तरफ से नाम बढ़ाए हैं, जिस पर अंतिम सहमति चर्चा के बाद प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को लेना है। हालांकि अंत में पेंच एबीवीपी बनाम युवा मोर्चा पर ही आकर टिक रहा है।
किन-किन युवा नेताओं का नाम
गजेंद्र सिंह तोमर (वीडी शर्मा के समर्थक): मुरैना जिले के दिमनी विधानसभा के रहने वाले हैं। 2018 से युवा मोर्चा में सक्रिय। वीडी शर्मा की कोर टीम के सदस्य। RSS में भी अच्छे संपर्क। लेकिन कम राजनीतिक अनुभव और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के क्षेत्र का होना पड़ सकता है भारी।
अंकित गर्ग (वीडी शर्मा के समर्थक): ABVP के पूर्व प्रदेश मंत्री, वी.डी. शर्मा के साथ लंबे समय काम किया। अच्छी एजुकेशन। सोशल मीडिया में अच्छा अनुभव। लेकिन प्रादेशिक पृष्ठभूमि का नहीं होना पद से रख सकता है दूर।
प्रवीण शर्मा (सीएम मोहन यादव के समर्थक): 38 वर्षीय ग्वालियर के रहने वाले । ABVP में लंबे समय काम किया,उज्जैन में भी काम करने का फायदा। सीएम मोहन यादव के करीबी, 2023 विधानसभा चुनाव में उज्जैन क्षेत्र में किया प्रचार। सवर्ण चेहरा होने के साथ-साथ आलोचकों के कारण बढ़ती है मुश्किलें।
रणजीत चौहान (शिवराज सिंह चौहान के समर्थक): किरार समाज से हैं, पिछली कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष रहे थे। शिवराज के साथ-साथ कार्यक्रमों दिखाई दिए। ओबीसी की लॉटरी खुलने पर सबसे मजबूत चेहरा। लेकिन शिवराज सिंह चौहान का समर्थक होने का भुगतना पड़ सकता है खामियाजा।
अंशुल तिवारी (हितानंद शर्मा के समर्थक): संगठन में काम करने का पुराना अनुभव। कांग्रेस के पूर्व विधायक के बेटे। युवा मोर्चा के रह चुके जिला अध्यक्ष। सामान्य वर्ग से आने का फायदा। आलोचकों के कारण पद से रह सकते हैं दूर।
इसी तरह सूत्रों के हवाले से मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी युवा मोर्चा के पूर्व उपाध्यक्ष गंगा पांडेय का नाम दिया है, साथ ही हितानंद शर्मा की तरफ से एक नाम और आ रहा है, वो है योगेंद्र सिंह ठाकुर का।
कौन लेगा फैसला
दिल्ली की सहमति के आधार पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ही फैसला लेंगे कि उनकी टीम में युवा विंग कौन संभालेगा। हालांकि इसके पीछे उनका पुराना संगठन का अनुभव बेहद ही मायने रखेगा, क्योंकि वीडी शर्मा की कार्यकारिणी में वे कोषाध्यक्ष के पद पर थे, और उन्होंने कई युवाओं को अपने सामने काम करते देखा है।


