रीवा/अरविन्द तिवारी/खबर डिजिटल/ रीवा से शिक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक सामने आई है। ई-अटेंडेंस लागू करने में लापरवाही की हद तब पार हो गई, जब विभाग ने नोटिस ऐसे तीन शिक्षकों को भेज दिया, जिनकी मौत पहले ही हो चुकी है। जिसके बाद कई सवालों ने जन्म ले लिया कि आखिर सरकारी तंत्र में इतनी बड़ी गलती कैसे हो सकती है, जिसमें जिम्मेदारों का पता लगाया जा रहा है।
वेतन-भत्तों की हो रही जांच
अब सवाल उठ रहा है कि क्या इन मृत शिक्षकों के नाम पर अब भी वेतन-भत्ते जारी हो रहे थे? प्रदेश के शासकीय स्कूलों में ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू होने के बाद विभाग की सख्ती बढ़ी है। इसी क्रम में जिला शिक्षा अधिकारी ने 1500 से अधिक शिक्षकों को नोटिस भेज दिया कि वे शिक्षक एप पर रोजाना हाजिरी क्यों नहीं लगा रहे। लेकिन जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं कि नोटिस उन तीन शिक्षकों को भी जारी कर दिया गया जिनका देहांत काफी पहले हो चुका था।
नोटिस में 3 दिन के भीतर मांगा जवाब
नोटिस में उनसे तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया और चेतावनी दी गई कि जवाब न देने पर वेतन रोक दिया जाएगा। इनमें शिक्षक देवतादीन कोल की मौत 2023 में हुई थी, जबकि छोटेलाल साकेत और रामगरीब दीपांकर का निधन 2025 में हो गया था। मामला उजागर होते ही शिक्षा विभाग में खलबली मच गई है, और अधिकारी इसे ‘विभागीय त्रुटि’ बताकर अपना पल्ला झाड़ने में जुटे हैं।


