घंसौर (सिवनी)/मनोज नामदेव/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार यूं तो हर तरफ विकास कर रही है, पर एक गांव ऐसा है जहां विकास कोसों दूर है। विकास का नाम अब नासूर बन गया है, ग्रामीणों को ना तो समय पर पूर्ण बिजली मिल रही है, ना ही स्वच्छ पानी और ना ही रोड की सुविधा ग्रामीणों ने चुनाव में बहिष्कार का भी मन बनाया है।
नर्मदा के डूब क्षेत्र में है गांव
मामला घंसौर विकासखंड अंतर्गत जिले के अंतिम छोर नर्मदा नदी डूब क्षेत्र अमझर टोला रोटो गांव स्थित है, यह गांव जंगलों के बीच नर्मदा नदी के डूब क्षेत्र में है। इस गांव में ना तो मेडिकल सुविधा पहुंचती है ना ही समय पर बिजली और ना ही पीने के लिए साफ-सुथरा पानी, इस गांव में आजादी के बाद से लेकर आज दिनांक तक विकास को से दूर है, लगातार ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन से लेकर जिला कलेक्टर तक आवेदन निवेदन किया, रोड पर आकर आंदोलन भी कर दिया पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
मतदान के बहिष्कार का बनाया मन
ग्रामीणों ने इस विधानसभा चुनाव में मतदान के बहिष्कार का मन भी बना लिया है, हमारी टीम ग्राउंड जीरो पर डगमगाते रास्ते और पगडंडी के सहारे ग्रामीणों तक पहुंची, तो देखा गांव में स्कूल भवन जर्जर हैस जहां पहले से पांचवीं तक के बच्चे अध्ययन करते हैं, आंगनवाड़ी केंद्र नहीं है, स्वास्थ्य सुविधा नहीं है, ग्रामीणों को इलाज करने के लिए 7 किलोमीटर जंगलों के बीच पैदल चलकर मुख्य मार्ग तक जाना होता है, जंगलों के बीच आने जाने का रास्ता ग्रामीण खुद बनाते हैं, हर साल बरसात रोड को अपने साथ ले जाती है, वहीं लगातार आंदोलन आवेदन निवेदन सब हो गया पर सरकार ने नहीं सुनी, वहीं हमारा प्रयास है ग्रामीणों की समस्या सरकार के समक्ष रखना, अब देखना होगा कि इस गांव की दशा कब बदलती है।


