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Friday, April 17, 2026
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Khabar Digital Reality Check: झोलाछाप डॉक्टरों की बल्ले-बल्ले… खबर डिजिटल का रियलिटी चेक.. मेडिकल की आड़ में चल रही डॉक्टरी

स्वास्थ्य विभाग के दावों की खुली पोल

Khabar Digital Reality Check: श्योपुर/धीरज बालोठिया/खबर डिजिटल/ मध्य प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने आदेश जारी कर झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश जारी किए हैं, इसके बाद श्योपुर में कार्रवाई भी शुरू की गई, लेकिन यह कार्रवाई केवल कागजों तक सिमट कर रह गई और झोलाछाप डॉक्टर अब 10 बाय 10 के कमरे में मरीजों का उपचार करते देखे जा रहे है। यह डॉक्टर आयुर्वेद, होम्योपैथी नहीं बल्कि एलोपैथी यानी एमबीबीएस डॉक्टर की तरह इलाज कर रहे है।यह झोलाछाप डॉक्टर न केवल मरीजों का इलाज कर रहे बल्कि उनकी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे है।

खबर डिजिटल की टीम का रियलिटी चेक
श्योपुर के वीरपुर में जब खबर डिजिटल की टीम रियलिटी चेक करने पहुंची तो झोलाछाप डॉक्टरों में भगदड़ मच गई, तीन डॉक्टरों से बातचीत की गई तो उनका जवाब था कि भारत में 70 फीसदी डॉक्टरों के पास किसी भी प्रकार की कोई डिग्री नहीं है,जब वह गलत नहीं है तो हम कैसे गलत होंगे। इतना ही नहीं एक डॉक्टर साहब तो अपनी 10 बाय 10 की दुकान में X-RAY मशीन लगाकर मरीजों की थेरेपी से लेकर X-RAY करते भी पाया गया। जब सवाल पूछा तो बोले साहब हम तो सेवा कर रहे है,आखिर ये किस तरह की सेवा है। क्या लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग कोई कार्रवाई नहीं करेगा, क्या लोगों की जान इतनी सस्ती हो गई है कि स्वास्थ्य महकमा और जिला प्रशासन आंखें मूंद कर बैठा है।

जिले में कम से कम 1 हजार फर्जी डॉक्टर
जिले में कम से कम 1 हजार से ज्यादा डॉक्टर हैं, जिनके पास मेडिकल प्रैक्टिस के लिए किसी तरह की डिग्री और रजिस्ट्रेशन नहीं है। इनमें से कई लोगों के पास बैचलर ऑफ फार्मेसी (बी फार्मा) की डिग्री है। इसके सहारे उन्होंने गांव-कस्बों के चौराहे पर मेडिकल स्टोर खोला है, पास ही खुद का क्लिनिक भी चलाते हैं। कई के पास फार्मेसी तो छोड़िए किसी तरह की डिग्री नहीं है, इसके बाद भी उन्होंने खुद के क्लिनिक खोल रखे हैं। ऐसे डॉक्टरों की भी अच्छी खासी संख्या हैं, जिनके पास आयुर्वेद, होम्योपैथी या यूनानी की डिग्री हैं, मगर वे एलोपैथी यानी एमबीबीएस डॉक्टर की तरह इलाज कर रहे हैं। एक बड़ी संख्या इलेक्ट्रो होम्योपैथी में बैचलर डिग्री वाले डॉक्टरों की भी है। इलाज के इस तरीके को किसी सरकारी एजेंसी से मान्यता हासिल नहीं है। लोग इन डॉक्टरों से इलाज करवाने को मजबूर हैं, क्योंकि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर ही नहीं हैं, यदि है भी तो वे समय पर उपलब्ध नहीं होते।

घर-घर जाकर कर रहे इलाज
खबर डिजिटल की रियलिटी चेक में ऐसा ही मामला श्योपुर के वीरपुर से सामने आया यहां झोलाछाप डॉक्टर बिना किसी मेडिकल डिग्री या रजिस्ट्रेशन के, किराए के मकान में क्लिनिक चला रहा है, वह उल्टी, दस्त, बुखार, दाद-खाज जैसी बीमारियों का इलाज तो करते ही है, साथ ही घर-घर जाकर भी मरीज देखता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वह बिना अनुमति के H1 ड्रग्स जैसी संवेदनशील दवाएं भी धड़ल्ले से बेच रहा है।

मेडिकल स्टोर की आड़ में मौत का कारोबार
विजयपुर, वीरपुर और आसपास के कई गांवों में ऐसे झोलाछाप मेडिकल दुकान की आड़ में क्लिनिक चला रहे हैं, इनका कोई मेडिकल प्रशिक्षण नहीं होता, न ही सरकार की कोई अनुमति, लेकिन ग्रामीणों की मजबूरी और चिकित्सा सुविधाओं की कमी के कारण ये लोग वहां “डॉक्टर” कहलाते हैं, स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे इन फर्जी डॉक्टरों के हौसले और बढ़ गए हैं।

जिम्मेदार कौन?
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी दिलीप सिंह सिकरवार का कहना है कि उन्हें शिकायत मिली है और कार्रवाई की जाएगी, लेकिन सवाल यह है कि कार्रवाई कब होगी और क्या तब तक और जानें इन झोलाछाप डॉक्टरों की भेंट चढ़ेंगी?

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