Monday, November 2, 2026
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Sunday Special News : डीमार्ट (DMart) की सफलता के पीछे के कारण… बाजार में ऐसे दी दिग्गजों को मात

ग्राहकों की समझ पर पकड़

भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ भारत के रिटेल बाजार में डीमार्ट की अपनी एक अलग ही पहचान है, जहां भी यह खुल जाता है, वहां ग्राहकों की लाइन अपने-आप लग जाती है। इसके लिए कहा जाता है कि यहां क्या पता कौनसा आकर्षण है कि लेने कुछ और जाते हैं। साथ में दूसरा और कुछ भी अपने-आप ले आते हैं। कम दाम और फायदों के इस बाजार ने लाखों ग्राहकों के दिल में जगह बना ली है, जोकि अपने-आप में बेहद ही खास है, क्योंकि बड़े-बड़े बिजनेस टाइकून के बाजारों को शिकस्त देकर डीमार्ट ने बड़ी सक्सेस स्टोरी लिख दी है।

कैसे शुरु हुआ डीमार्ट ?
डीमार्ट की स्थापना प्रसिद्ध निवेशक और शेयर बाजार विशेषज्ञ राधाकिशन दमानी ने 2002 में की थी। पहला डीमार्ट स्टोर मुंबई के पवई में खोला गया ता और इसने भारत में नई खुदरा क्रांति की शुरुआत हुई। राधाकिशन दमानी का विजन था कि एक ऐसी खुदरा श्रृंखला बनाना जो प्रतिस्पर्धी कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद के दम पर ग्राहकों को खुश करके घर भेजे।

कड़ी प्रतिस्पर्धा में जीती जंग
अपने शुरुआती सालों में डीमार्ट के सामने बिग बाजार और रिलायंस फ्रेश जैसे स्थापित ब्रांड्स की कड़ी चुनौती थी, हालाँकि, दमानी के रणनीतिक दृष्टिकोण और भारतीय उपभोक्ता बाजार की गहरी समझ ने डीमार्ट को अपनी अलग पहचान बनाने में मदद की। दमानी ने कुछ जरुरी और सीमित रेंज पर अपना ध्यान केंद्रीत किया और गुणवत्ता के साथ उन्हें लेकर आगे बढ़े, जिसमें कीमतों का बड़ा योगदान है।

विस्तार और विकास
डीमार्ट के विस्तार की भी अपनी ही कहानी है, मुंबई से शुरु हुआ सफर आज कई प्रदेशों की सीमा को पार कर चुका है, और ग्राहकों के दिलों को जीतने में कामयाब रहा। साल 2025 के सितंबर माह तक देशभर में डीमार्ट के कुल 432 स्टोर्स हो चुके हैं, वहीं कंपनी की इच्छा है कि आगामी वक्त में 1500 स्टोर्स तक विस्तार किया जाए।

निवेशकों के लिए फायदेमंद
2017 में, डीमार्ट की मूल कंपनी, एवेन्यू सुपरमार्ट्स, एक बेहद सफल आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानीआईपीओ के साथ सार्वजनिक हुई। इसके आईपीओ को 104 गुना अधिक अभिदान मिला, जो डीमार्ट के व्यावसायिक मॉडल और विकास की संभावनाओं में निवेशकों के मजबूत विश्वास को दर्शाता है। एवेन्यू सुपरमार्ट्स कंपनी निवेशकों के बीच आज भी पसंदीदा बनी हुई है, और इसके शेयर लगातार अच्छा रिटर्न दे रहे हैं।

खुदरा किराना प्रमुख प्रोडक्ट
डीमार्ट का मुख्य व्यवसाय खुदरा किराना है, जिसमें सबसे खास बात है कि पैकिंग में और खुले प्रोडक्ट एक ही जगह पर कम दाम में मिलने के चलते ग्राहकों को यह आकर्षित कर रहा है। इसमें सबसे ज्यादा मध्यमवर्गीय बजट वाले शामिल हैं। उत्पादों के रुप में चावल, आटा, दाल, स्नेक्स आइटम, पेय पदार्थ, साबुन, शैंपू, त्वचा देखभाल उत्पाद और स्वास्थ्य पूरक, फल, सब्जियां, डेयरी उत्पाद और बेकरी आइटम शामिल है।

गुणवत्ता और मूल्य पर विशेष ध्यान
जानकारों के अनुसार डीमार्ट की सक्सेस के पीछे एक कारण कीमतों पर नियंत्रण लगाना शामिल है, वो कंपनियों से डील ही इसी आधार पर करते हैं कि उनको कम कीमत में सामान की डिलीवरी हो और वो ग्राहकों को भी वाजिब दाम पर बेच सके। जिसके लिए बताया जाता है कि कई व्यापारियों ने डीमार्ट के लिए अलग से अपनी फैक्ट्रियां तक लगाई है।

अन्य उत्पादों की भी श्रृंखला
डीमार्ट में किराने के सामान के अलावा रोजमर्रा की जरुरत की अन्य चीजें भी मिलती है, जैसे किफायती कपड़े, जूते, कैज़ुअल वियर, फॉर्मल वियर, मौसमी कलेक्शन, रसोई के बर्तन, कुकवेयर, घरेलू सामान, सजावट के सामान। इसी तरह से इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण, स्टेशनरी, खिलौने भी एक ही छत के नीचे आसानी से मिल जाते हैं।

डीमार्ट का बिजनेस मॉडल – कम कीमतें!
डीमार्ट के बिजनेस मॉडल का अध्ययन करने पर पाते हैं कि इनके संचालन की सोच एक ही है और वो “रोज़ाना कम कीमतों” की अवधारणा पर आधारित। हालांकि यह दृष्टिकोण आसान नहीं होता फिर भी ग्राहकों की जेब हल्की किए बिना उसे अच्छा प्रोडक्ट मिले तो वह बार-बार उसी स्टोर में आता है, इसी का ध्यान डीमार्ट के संचालन में रखा गया है, जोकि इसकी सक्सेस का एक बड़ा कारण है।

किराए की बिल्डिंग की बजाय स्वामित्व पर जोर
डीमार्ट के बिजनेस मॉडल की एक सबसे बड़ी खासियत यह है कि वो किराए पर बिल्डिंग लेने के बजाय वो खुद की बिल्डिंग में ही व्यापार करते हैं, चाहे कुछ भी हो जाए, जिसका नतीजा स्थायित्व और किराये के बोझ से मुक्ति के साथ संपत्ति के दाम में बढ़ोतरी का लाभ भी मिलता जाता है, जिसका फायदा सीधे-सीधे ग्राहकों को मिलता है।

रणनीतिक स्टोर स्थान को तवज्जो
अपनी स्टोर स्थान के लिए डीमार्ट का जोर पूरी तरह से ऐसी जगह पर होता है कि जहां से आना-जाना आसान हो, साथ ही एक स्टोर से कई बड़ी आबादी को कवर किया जा सके। उस आबादी के हिसाब से ही स्थान चुना जाता है, कभी भी देखा जाता है कि डीमार्ट के दो स्टोर के बीच एक तयशुदा दूरी साफ दिखाई देगी, जिसका अर्थ डिस्टेंस का पूरा ध्यान रखा गया है।

डीमार्ट सक्सेस मंत्र
डीमार्ट की सक्सेस स्टोरी एक सकारात्मक सोच को आगे बढ़ाती नजर आती है कि ग्राहकों को लाभ पहुंचाते चलो, बड़े आदमी बन जाओगो। इसी सिद्धांत के आधार पर डीमार्ट ने साबित कर दिया कि ग्राहक की जरुरत और उसकी जेब ही तय करती है कि कोई भी व्यापार किसके लिए कितना मुफीद है।

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