डिंडौरी/शैलेश नामदेव/खबर डिजिटल/जनपद पंचायत डिंडोरी अंतर्गत ग्राम पंचायत तेंदूमेर मोहतरा के वन ग्राम विनौदी में वर्षों से चले आ रहे जल संकट से अब स्थायी राहत मिलती नजर आ रही है। महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत निर्मित सार्वजनिक तालाब ने बैगा बहुल इस वन ग्राम के लिए जल का मजबूत आधार तैयार कर दिया है। गर्मी के मौसम में जहां बूंद-बूंद पानी के लिए ग्रामीणों को संघर्ष करना पड़ता था, वहीं अब यही तालाब जीवनदायिनी संरचना के रूप में सामने आया है।
हर गर्मी में होती है समस्या
वन ग्राम विनौदी एक बैगा बहुल क्षेत्र है, जहां हर वर्ष गर्मी शुरू होते ही पानी की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती थी। जल संरक्षण और संवर्धन को महात्मा गांधी नरेगा योजना के प्रमुख उद्देश्यों के रूप में साकार करते हुए वित्तीय वर्ष 2024-25 में ग्राम विनौदी में लगभग 24.41 लाख रुपये की लागत से सार्वजनिक तालाब निर्माण की स्वीकृति दी गई। यह निर्णय ग्रामीणों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया।
वन विभाग ने दी अनुमति
तालाब निर्माण के लिए वन विभाग द्वारा भूमि उपयोग की अनुमति प्रदान की गई, जिसके बाद यह महत्वपूर्ण कार्य संभव हो सका। अनुमति मिलते ही कार्य को गति दी गई और इसमें न केवल स्थानीय ग्रामीणों बल्कि आसपास की ग्राम पंचायतों के मनरेगा मजदूरों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई। योजना के अंतर्गत कुल 4180 मानव दिवस का रोजगार सृजित किया गया, जिसमें लगभग 12 लाख रुपये मजदूरी भुगतान के लिए निर्धारित किए गए।
तालाब लबालब भरा
कार्य पूर्ण होते ही पहली ही बारिश में तालाब लबालब भर गया, जिससे ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। वर्तमान में यह तालाब न केवल ग्रामीणों की दैनिक जल आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है, बल्कि पशुपालन और वन्य जीवों के लिए भी एक महत्वपूर्ण जल स्रोत बन गया है। जिले के भ्रमण के दौरान मनरेगा आयुक्त अवि प्रसाद ने ग्राम विनौदी पहुंचकर इस सार्वजनिक तालाब का अवलोकन किया और इसे जल संकट से निपटने की दिशा में एक सराहनीय और अनुकरणीय प्रयास बताया।
मनरेगा आयुक्त अवि प्रसाद ने कहा
उन्होंने कहा कि ऐसे कार्य ग्रामीण जीवन को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाते हैं। आज वन ग्राम विनौदी का यह सार्वजनिक तालाब केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि सरकार की योजनाओं के सही क्रियान्वयन, ग्रामीण श्रम की ताकत और जल संरक्षण की सोच का जीवंत उदाहरण बन चुका है। यह तालाब आने वाले वर्षों में गांव के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय विकास की मजबूत नींव साबित होगा।
