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Friday, April 17, 2026
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Dindori News: जंगली सूअर के मांस के साथ 8 आरोपी धराए… करंजिया में वन विभाग का शिकंजा

गुप्त सूचना बनी कार्रवाई की वजह

डिंडोरी /शैलेश नामदेव /खबर डिजिटल/ वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए करंजिया क्षेत्र में वन विभाग ने अवैध शिकार और मांस उपभोग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। मुखबिर से प्राप्त गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में जंगली सूअर का कच्चा एवं पका हुआ मांस जब्त किया गया, जबकि इस मामले में 8 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

जंगली सूअर का शिकार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जैसे ही वन विभाग को जंगली सूअर के अवैध शिकार और मांस संग्रहण की सूचना मिली, विभागीय अमले ने बिना समय गंवाए योजनाबद्ध तरीके से मौके पर दबिश दी। तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से प्रतिबंधित वन्यजीव का मांस बरामद हुआ, जिसे तत्काल जब्त कर लिया गया।

कानूनन दंडनीय अपराध
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वन विभाग द्वारा की गई यह कार्रवाई वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है। जंगली सूअर जैसे संरक्षित वन्यप्राणी का शिकार, उसका मांस रखना या उपभोग करना कानूनन दंडनीय अपराध है, जिसके लिए कठोर सजा का प्रावधान है।
ये हैं मामले में आरोपी
रामसिंह उरेती – जगतपुर
छोटेलाल – जगतपुर
उदय उरेती – जगतपुर
गुलाब सिंह कुशराम – परसेल
ज्ञानसिंह कुल्हड़ियां – नारी ग्वारा
लालसिंह नेटी – जगतपुर
रोशन सिंह परस्ते – कोयलारी
कुलदीप सिंह परस्ते – परसेल

वन अमले की सतर्कता से मिली सफलता
इस कार्रवाई का नेतृत्व पूर्व करंजिया वन परिक्षेत्र के अधिकारियों द्वारा किया गया। परिक्षेत्र अधिकारी कोशुंबा झा, परिक्षेत्र सहायक प्रमोद पाटिल सहित उपवन क्षेत्रपाल सेवाराम उईके, वनपाल शिव कुमार मरावी तथा वनरक्षक तीरथ राज खैरवार, विकास सोनवानी, ध्रुवकुमार धुर्वे, रघुनाथ प्रजापति, रमेश मार्को और मनोज भारतीय सहित समस्त वन स्टाफ कार्रवाई में शामिल रहा।

वन्यजीव संरक्षण को लेकर सख्त संदेश
वन विभाग ने इस कार्रवाई के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया है कि जिले में वन्यजीवों के शिकार और अवैध गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा में भागीदार बनें तथा किसी भी प्रकार की संदिग्ध या अवैध गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग को दें। यह कार्रवाई न केवल कानून का भय स्थापित करती है, बल्कि आने वाले समय में वन्यजीव संरक्षण को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

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