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Friday, April 17, 2026
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शासकीय उचित मूल्य दुकान में खुला भ्रष्टाचार का खेल छह वार्डों के गरीबों से लूट, प्रशासनिक संरक्षण के आरोप

शासकीय उचित मूल्य दुकान में खुला भ्रष्टाचार का खेल छह वार्डों के गरीबों से लूट, प्रशासनिक संरक्षण के आरोप

जिला प्रशासन चुप गरीबों के साथ अन्याय, मंत्री के नाम की धौस

कटनी – विजयराघवगढ़ नगर में संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकान गरीबों के हक पर डाका डालने का अड्डा बनती जा रही है। छह वार्डों का राशन वितरण करने वाली इस दुकान में नियम-कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। न दुकान का स्पष्ट पता, न रेट लिस्ट चस्पा और न ही पारदर्शिता। आरोप है कि प्रशासनिक तंत्र की नाक के नीचे या कहें उसकी मूक सहमति से जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि इस कथित अंधेरगर्दी का संचालन एक महिला के नाम पर पंजीकृत दुकान से किया जा रहा है। जबकि व्यवहारिक रूप से संचालन कोई और कर रहा है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अधिकारियों को खुश करना और गरीबों को लूटना इस दुकान का रिवाज बन चुका है। वर्षों से गरीबों के निवाले पर डाका डाला जा रहा है और जवाबदेही शून्य है।शिकायत के बाद मामले ने तब और गंभीर मोड़ लिया जब आरोप सामने आया कि कुलदीप तिवारी जो स्वयं को दुकान का संचालक बताता है शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहा है। आरोप है कि वह भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व संगठन मंत्री जितेन्द्र लोरियाँ के नाम का दुरुपयोग करते हुए फोन पर बात कराने की धमकी देता है। जबकि दुकान महिला के नाम पर पंजीकृत है ऐसे में संचालन और जिम्मेदारी को लेकर सवाल और गहरे हो जाते हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि गरीबों का अनाज पचा कर प्रभावशाली लोगों की जेबें भरी जा रही हैं और इसी वजह से लंबे समय से इस भ्रष्टाचार को प्रशासनिक संरक्षण मिलता रहा। यदि सब कुछ ठीक था तो फिर शिकायतों के बाद ही लगातार दो दिनों से अनाज वितरण क्यों शुरू हुआ क्या यह पहली बार है जब नियमों के मुताबिक वितरण किया जा रहा है। यह मामला सिर्फ एक दुकान का नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। सवाल साफ हैं बिना रेट लिस्ट और सूचना के दुकान कैसे चल रही थी। किसके संरक्षण में वर्षों तक नियमों का उल्लंघन होता रहा प्रभावशाली नामों की धौंस देकर शिकायत दबाने की कोशिश क्यों अब आवश्यकता है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो स्टॉक रजिस्टर वितरण पर्ची ई-पॉस मशीन और लाभार्थी सूची का भौतिक सत्यापन कराया जाए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो।क्योंकि गरीबों के निवाले पर हाथ डालने वालों के लिए नरमी नहीं सख्ती ही न्याय है।

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