Wednesday, November 4, 2026
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नर्मदा शुद्धिकरण का ‘डिंडौरी मॉडल’: 1 करोड़ 20 लाख रुपये से बदलेगी जीवनदायिनी की सूरत

अब नालों की गंदगी नहीं छुएगी पुण्य सलिला

डिंडोरी /शैलेश नामदेव /खबर डिजिटल/ नववर्ष 2026 का सूरज डिंडौरी जिले के लिए केवल कैलेंडर का बदलाव नहीं, बल्कि मां नर्मदा की अविरलता और निर्मलता की दिशा में एक नए युग का सूत्रपात लेकर आया है। “नमामि देवी नर्मदे” के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए जिला प्रशासन ने नगर के प्रदूषित नालों पर सर्जिकल स्ट्राइक शुरू कर दी है। 1 करोड़ 20 लाख रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिए अब नर्मदा के आंचल में मिलने वाली गंदगी पर पूरी तरह से लगाम कसी जाएगी।

​आस्था और पर्यावरण का संगम: कलेक्टर की ऐतिहासिक पहल
​गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कलेक्ट्रेट अंजू पवन भदौरिया ने इस विशेष कार्ययोजना का खाका पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नर्मदा के उद्गम के बाद डिंडौरी पहला ऐसा प्रमुख पड़ाव है, जहा नगर के नालों का गंदा पानी नदी की पवित्रता को भंग कर रहा था। लंबे समय से परिक्रमावासियों और स्थानीय नागरिकों की इस पीड़ा को समझते हुए प्रशासन ने भोपाल स्तर पर पत्राचार कर इस विशेष बजट और योजना को स्वीकृति दिलाई है।

7 नालों पर ‘पहरा’, आधुनिक तकनीक से उपचार
​प्रशासन ने उन 07 चिन्हित स्थानों पर काम शुरू कर दिया है, जो वर्षों से प्रदूषण का मुख्य स्रोत बने हुए थे। योजना की खास बातें इस प्रकार हैं:

​रिटेनिंग वॉल और पम्पिंग स्टेशन: चंद्रविजय कॉलेज और श्मशान घाट जैसे संवेदनशील इलाकों में लिफ्टिंग पम्पिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं।
​ग्रेविटी और लिफ्टिंग सिस्टम: 2 नालों को पम्पिंग सिस्टम और 5 नालों को प्राकृतिक ढाल (ग्रेविटी) के आधार पर सीवर लाइन से जोड़ा जाएगा।
​वेस्ट टू वेल्थ: नालों का गंदा पानी अब सीधे नदी में जाने के बजाय सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) जाएगा। यहां उपचारित होने के बाद इस पानी का उपयोग खेती और व्यावसायिक कार्यों में किया जाएगा, जिससे जल संरक्षण का लक्ष्य भी पूरा होगा।
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मिशन ’90 दिन’: नर्मदा जयंती पर मिलेगी पहली सौगात
​प्रशासन ने इस कार्य के लिए बेहद सख्त समय-सीमा तय की है। मेसर्स जे.एम. रमानी एण्ड कम्पनी ने मशीनरी के साथ मोर्चेबंदी शुरू कर दी है। लक्ष्य यह है कि आगामी 3 महीनों में पूरा प्रोजेक्ट तैयार हो जाए, लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण यह है कि नर्मदा जयंती के पावन अवसर पर प्रथम चरण के 3 नालों को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा, ताकि श्रद्धालु स्वच्छ जल में आचमन कर सकें।

​अगला पड़ाव: दाएं तट की मुक्ति
​कलेक्टर ने भविष्य की योजना साझा करते हुए बताया कि बाएँ तट के बाद अब प्रशासन का ध्यान दाएँ तट पर है। इसके लिए प्रमुख सचिव स्तर पर चर्चा जारी है। प्रशासन का विजन डिंडौरी को प्रदेश का ऐसा पहला जिला बनाना है, जहां नर्मदा का प्रवाह पूरी तरह से “जीरो डिस्चार्ज” (शून्य प्रदूषण) वाला हो।

​”माँ नर्मदा हमारे लिए केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि हमारी चेतना और अस्तित्व का आधार हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि वर्ष 2026 डिंडौरी की स्वच्छता के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो।” — अंजू पवन भदौरिया, कलेक्टर डिंडौरी
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ये रहे उपस्थित
प्रेस वार्ता में नगर पालिका सीएमओ अमित तिवारी, जनसंपर्क अधिकारी चेतराम अहिरवार सहित जिले के वरिष्ठ पत्रकार उपस्थित रहे।

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