नई दिल्ली : भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के अनुसंधान प्रभाग ने अपनी नवीनतम ‘ईकोव्रैप’ रिपोर्ट में भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी विकास दर 7.5% के स्तर को छू सकती है, जो राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा लगाए गए 7.4% के अग्रिम अनुमान से भी अधिक है। एसबीआई रिसर्च का मानना है कि 2022-23 के नए आधार वर्ष (Base Year Revision) के लागू होने से विकास के इन आंकड़ों में भविष्य में और अधिक सुधार देखने को मिल सकता है।
आर्थिक विकास के मुख्य चालकों में सेवा क्षेत्र (Services Sector) अब भी अर्थव्यवस्था का प्रमुख इंजन बना हुआ है, जिसमें वित्त वर्ष 2026 के दौरान 9.1% की शानदार वृद्धि की उम्मीद जताई गई है। विशेष रूप से ‘वित्तीय और रियल एस्टेट सेवाओं’ तथा ‘लोक प्रशासन’ जैसे उप-क्षेत्रों में 9.9% की उच्च वृद्धि दर दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त, निवेश की मांग में भी महत्वपूर्ण सुधार देखा गया है, जहाँ पूंजी निर्माण (Capital Formation) की वास्तविक दर पिछले वर्ष की तुलना में 70 आधार अंक (bps) बढ़कर 7.8% रही है। यह वृद्धि दर देश में बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विस्तार के प्रति निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।
रिपोर्ट में नागरिकों की वित्तीय स्थिति में सुधार के भी संकेत दिए गए हैं। विकास की इस तीव्र गति के कारण भारत की प्रति व्यक्ति वार्षिक आय में ₹16,025 की वृद्धि होने की संभावना है, जिससे यह वित्त वर्ष 2026 में ₹2,47,487 के स्तर पर पहुँच जाएगी। हालाँकि, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की विकास दर पिछले वर्ष के 4.6% के मुकाबले गिरकर 3.1% रहने का अनुमान है, जिससे निजी उपभोग (Private Consumption) की वृद्धि दर थोड़ी धीमी होकर 7.0% पर रह सकती है। राजकोषीय मोर्चे पर, उच्च ‘गैर-कर राजस्व’ (non-tax revenue) के कारण अर्थव्यवस्था के संतुलित रहने और राजकोषीय घाटा 4.4% पर स्थिर रहने की संभावना जताई गई है।


