आलीराजपुर/कुलदीप खराडीया/खबर डिजिटल/ जिले में शीतलहर और अत्यधिक ठंड के प्रभाव को देखते हुए फसलों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र आलीराजपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. आर.के. यादव, परियोजना संचालक आत्मा श्री दादू सिंह मौर्य तथा परियोजना उपसंचालक आत्मा श्री बी.एस. बघेल के संयुक्त दल ने गुरुवार को जिले के विभिन्न ग्रामों का भ्रमण किया।
गेहूं, चना, मक्का, बाजरा की फसलों का निरीक्षण
संयुक्त दल ने खारकुआं, मयाला, बेगड़ी, खरपाई, राजावाट सहित अन्य गांवों में पहुंचकर गेहूं, चना, मक्का, बाजरा आदि फसलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बुआई के अनुसार फसलों में फूल, फल, कल्ले, बालियां और भुट्टों की स्थिति अच्छी पाई गई, जिससे किसानों में संतोष का माहौल नजर आया।
कुसुम फसल के बारे में ली जानकारी
भ्रमण के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा जिले की कृषि सखियों को नवाचार के तहत उपलब्ध कराए गए कुसुम फसल के बीजों से उगाई गई फसल का भी निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में कुसुम फसल की स्थिति संतोषजनक पाई गई। अधिकारियों ने बताया कि कुसुम फसल जिले के किसानों के लिए अधिक आमदनी का बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।
इल्ली के प्रकोप से बचने के उपाय
संयुक्त दल ने गांवों के किसानों से संवाद कर उनकी फसल संबंधी समस्याएं भी सुनीं और मौके पर ही समाधान बताए। वैज्ञानिकों द्वारा कीट प्रबंधन को लेकर आवश्यक सलाह दी गई। मक्का फसल में तने की इल्ली के नियंत्रण के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट 10 ग्राम प्रति पंप छिड़काव की सलाह दी गई। वहीं चना फसल में इल्ली के प्रकोप पर प्रोफेनोफॉस कीटनाशक 45 मिली प्रति पंप छिड़काव करने की बात कही गई। सब्जी फसलों में माहू सहित अन्य रस चूसक कीटों के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 7 से 10 मिली प्रति पंप छिड़काव करने की सलाह दी गई। कृषि अधिकारियों के इस भ्रमण से किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन मिला और फसलों को लेकर उनकी चिंताएं काफी हद तक दूर हुईं।


