सतना/अंकित शर्मा/खबर डिजिटल/ शासन की दिव्यांगजन कल्याण योजनाएं कागजों तक सीमित होती नजर आ रही हैं। जिले के कोठी क्षेत्र के कठबरिया गांव में रहने वाला दिव्यांग दम्पति बीते चार वर्षों से मोटराइज्ड ट्राई साइकिल पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन आज तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है, और हर बार उनके हाथ निराशा ही लगी।
कामता प्रसाद, ममता ने सुनाई पीड़ा
पीड़ित कामता प्रसाद वर्मा और उनकी पत्नी ममता वर्मा दोनों ही शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं। उनका कहना है कि दैनिक जीवन के छोटे-छोटे कामों से लेकर इलाज और रोजगार के लिए उन्हें बैट्री चालित ट्राई साइकिल की अत्यंत आवश्यकता है। साधारण हाथ से चलने वाली ट्राई साइकिल से न तो वे लंबी दूरी तय कर पाते हैं, और न ही दोनों पति-पत्नी के लिए वह व्यावहारिक साबित हो रही है। दम्पति ने बताया कि वे अब तक जिला कलेक्टर की जनसुनवाई में तीन बार लिखित आवेदन दे चुके हैं। हर बार अधिकारियों द्वारा जांच और शीघ्र निराकरण का भरोसा दिलाया जाता है, लेकिन कुछ समय बाद वही स्थिति जस की तस बनी रहती है। कभी उन्हें समाज कल्याण विभाग भेज दिया जाता है, तो कभी पंचायत स्तर पर मामला अटक जाता है।
हाथ से चलने वाली ट्राई साइकिल दे दी गई
कामता प्रसाद का कहना है कि एक बार उन्हें हाथ से चलने वाली ट्राई साइकिल दे दी गई, जबकि उन्होंने स्पष्ट रूप से बैट्री वाली गाड़ी की मांग की थी। दोनों दिव्यांग होने के कारण हाथ गाड़ी उनके लिए उपयोगी नहीं है। ऐसे में वह घर से बाहर निकलने में भी असमर्थ हो जाते हैं। यहां सवाल खड़ा होता है कि यदि शासन की योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक समय पर नहीं पहुंचेगा तो योजनाओं का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। चार साल तक एक मामूली सुविधा के लिए भटकना प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है। दिव्यांग दम्पति ने जिला प्रशासन से एक बार फिर मांग की है कि उनकी स्थिति को समझते हुए तत्काल मोटराइज्ड ट्राई साइकिल उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक अपना जीवन यापन कर सकें।


