Tuesday, November 3, 2026
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श्योपुर: नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म मामले में कोर्ट ने दो दोषियों को दी आजीवन कारावास की सजा

न्यायालय के कड़े फैसले से पीड़िता को मिला न्याय, अपराधियों को भुगतनी होगी उम्रकैद

श्योपुर/धीरज बालोठिया/खबर डिजिटल/ नाबालिग बालिका के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में श्योपुर न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए दोनों दोषी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने पीड़िता को 10 लाख रुपये की प्रतिकर राशि दिलाने के आदेश भी दिए हैं।जानकारी के अनुसार 15 वर्षीय नाबालिग बालिका 16 सितंबर 2024 को दोपहर के समय घर से सामान लेने दुकान जा रही थी। इसी दौरान एक आरोपी ने उसे बहाने से अपनी गली में बुलाया और जबरन मकान के अंदर खींच लिया। वहां पहले से मौजूद दूसरे आरोपी ने दरवाजा बंद कर दिया। आरोप है कि एक आरोपी ने पीड़िता के साथ मारपीट की, जबकि दूसरे ने चाकू दिखाकर उसे डराया और इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म किया गया।

थाने में शिकायत दर्ज कराई गई

घटना के दौरान शोर सुनकर दुकानदार मौके पर पहुंच गया, जिससे विवाद हो गया। आवाज सुनकर पीड़िता की मां और भाई भी वहां पहुंच गए और पीड़िता को आरोपियों के चंगुल से छुड़ाकर घर ले आए। बाद में परिजनों द्वारा थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।

सामूहिक दुष्कर्म अत्यंत गंभीर अपराध

मामले की सुनवाई तृतीय अपर सत्र न्यायालय, श्योपुर में हुई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म अत्यंत गंभीर अपराध है, जो समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है। इस तरह के अपराध बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

आजीवन कारावास की सजा

न्यायालय ने दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए पीड़िता को आर्थिक सहायता के रूप में 10 लाख रुपये प्रतिकर देने के आदेश दिए। प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्रीमती प्रतिभा उमरैया एवं एडीपीओ रिचा शर्मा द्वारा प्रभावी पैरवी की गई।

एक ही जिले के है दोनों आरोपी

नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषी पाए गए दोनों आरोपी श्योपुर के निवासी हैं। पहले आरोपी का नाम 21 वर्षीय नानका उर्फ शोएब पिता सरफराज खान है। दूसरा आरोपी 23 वर्षीय मोहसिन उर्फ मोसीन पिता
मकसूद खान है। दोनों आरोपियों को न्यायालय द्वारा गंभीर अपराध का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह के अपराध समाज में भय और असुरक्षा की भावना पैदा करते हैं और ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है।

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