मुंबई : कमोडिटी बाज़ार में जारी जबरदस्त तेजी और कंपनी के भीतर चल रहे संरचनात्मक बदलावों के कारण वेदांता लिमिटेड के शेयरों ने 14 जनवरी को 675 रुपये का नया सर्वकालिक उच्च स्तर (All-time High) छुआ। इस उछाल के साथ ही अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली इस कंपनी का बाजार पूंजीकरण (Market Cap) बढ़कर 2.6 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। उल्लेखनीय है कि इस साल की शुरुआत से अब तक शेयर में 11% और पिछले एक साल में 56% से अधिक की शानदार बढ़त दर्ज की गई है।
डीमर्जर और वैल्यू अनलॉकिंग शेयरों में इस तेजी का सबसे बड़ा कारण 16 दिसंबर को NCLT (मुंबई बेंच) द्वारा वेदांता के डीमर्जर प्लान को मिली मंजूरी है। इस योजना के तहत, वेदांता पांच अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में विभाजित होगी। प्रत्येक इकाई का अपना स्वतंत्र प्रबंधन और पूंजी ढांचा होगा, जिससे निवेशकों को एल्यूमिनियम, ऑयल एंड गैस, पावर और स्टील जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में सीधे निवेश करने का मौका मिलेगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से कंपनी की वास्तविक वैल्यू सामने आएगी और शेयरधारकों को लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिलेगा।
कमोडिटी कीमतों और हिंदुस्तान जिंक का प्रभाव वैश्विक बाजार में एल्यूमिनियम की कीमतों में तेजी और कॉपर (तांबा) के पहली बार 13,000 डॉलर प्रति टन के पार पहुंचने से वेदांता के मुनाफे में बड़ी बढ़त की उम्मीद है। इसके साथ ही, वेदांता की सहायक कंपनी हिंदुस्तान जिंक को भी चांदी (Silver) की बढ़ती कीमतों का भरपूर लाभ मिला है। हिंदुस्तान जिंक का मार्केट कैप भी 2.81 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गया है। जेफरीज जैसी ग्लोबल रिसर्च फर्म्स ने हिंदुस्तान जिंक को दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक और शीर्ष-5 सिल्वर उत्पादकों में से एक बताते हुए इस पर सकारात्मक रेटिंग दी है।
बाजार में स्थिति दिसंबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार, बैंकिंग और सरकारी कंपनियों को छोड़कर वेदांता अब भारत की 23वीं सबसे मूल्यवान लिस्टेड कंपनी बन गई है। लाभांश (Dividend) को मिलाकर कंपनी का कुल वार्षिक रिटर्न लगभग 60% रहा है, जो निफ्टी 50 और सेंसेक्स के मुकाबले पांच गुना बेहतर प्रदर्शन है। लागत में कमी और उत्पादन में वृद्धि की संभावनाओं ने निवेशकों के बीच वेदांता के प्रति विश्वास को और मजबूत किया है।


