संबलपुर: भारत के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान आईआईएम संबलपुर ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय के तहत नेशनल एससी-एसटी हब के सहयोग से एससी-एसटी उद्यमियों के लिए एक विशेष 6-दिवसीय ‘बिजनेस एक्सेलेरेटर कार्यक्रम’ का शुभारंभ किया है। 19 से 24 जनवरी तक चलने वाले इस ऑन-कैंपस सत्र का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को आवश्यक व्यावसायिक, वित्तीय और डिजिटल कौशल से लैस करना है। ‘विकसित भारत 2047’ और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप, यह पहल हाशिए पर मौजूद समुदायों को मुख्यधारा के आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र में सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
यह 12-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम हाइब्रिड मॉडल पर आधारित है, जिसमें कैंपस सत्रों के साथ-साथ ऑनलाइन शिक्षण और आगामी छह महीनों तक निरंतर हैंडहोल्डिंग समर्थन शामिल है। पहले बैच में ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के 25 चुनिंदा उद्यमियों ने हिस्सा लिया है। कार्यक्रम के उद्घाटन के अवसर पर आईआईएम संबलपुर के निदेशक, प्रो. महादेव जायसवाल ने कहा कि उद्यमिता केवल व्यक्तिगत संपत्ति सृजन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए मूल्य निर्माण की प्रक्रिया है। उन्होंने नवाचार और जिम्मेदार नेतृत्व पर जोर देते हुए कहा कि विकसित भारत के लिए जमीनी स्तर पर ऐसे उद्यमियों की आवश्यकता है जो समुदायों और पर्यावरण की रक्षा करते हुए विकास करें।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री सम्बित त्रिपाठी और विशिष्ट अतिथि सुश्री निबेदिता नायक ने समावेशी विकास को आज की आर्थिक आवश्यकता बताया। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि मजबूत व्यावसायिक योजनाएं और क्षमता निर्माण ही एससी-एसटी उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सकते हैं। आईआईएम संबलपुर की इस पहल से न केवल स्थानीय रोजगार सृजन में मदद मिलेगी, बल्कि यह नवाचार-आधारित उद्यमिता के माध्यम से भारत के आर्थिक लचीलेपन को भी मजबूत करेगा। संस्थान इस कार्यक्रम के दूसरे समूह की शुरुआत फरवरी 2026 में वर्चुअल वीकेंड सत्रों के साथ करने के लिए तैयार है।


