आलीराजपुर/कुलदीप खराड़ीया/खबर डिजिटल/ आम्बुआ से गुजरात सीमा तक प्रस्तावित नेशनल हाईवे-56 के निर्माण को लेकर आदिवासी बहुल इलाकों में चिंता बढ़ गई है। इस परियोजना के तहत आम्बुआ, ईटारा, टेमाची, कालुवाट, बेहडवा, बड़ा भावटा, काल्यावाव, छोटी मालपुर, बड़ी मालपुर, सेजावाड़ा और काकडबारी सहित कई गांवों की जमीन और मकानों का अधिग्रहण किया जा रहा है।
पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में अधिग्रहण पर सवाल
यह पूरा इलाका संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां आदिवासी समाज पीढ़ियों से निवास करता आ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे इन जमीनों के मूल मालिक हैं और उन्हें संविधान द्वारा जीवन, निवास और आजीविका का मौलिक अधिकार प्राप्त है।
कम मुआवजे से असंतोष
ग्रामीणों का आरोप है कि शासन की गाइडलाइन के अनुसार दिया जा रहा मुआवज़ा अत्यंत कम है। इस राशि से न तो वे नई जमीन खरीद सकते हैं और न ही अपने परिवार के लिए सुरक्षित आवास की व्यवस्था कर सकते हैं। लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि जब राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में नेशनल हाईवे परियोजनाओं में पांच गुना तक मुआवजा दिया जा रहा है, तो मध्यप्रदेश के आदिवासी परिवारों को इससे वंचित क्यों रखा जा रहा है।


