मुंबई : इस गणतंत्र दिवस के अवसर पर, गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के अप्लायंसेज़ बिज़नेस ने भारत की सदियों पुरानी हथकरघा विरासत को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए ‘टेस्टेड फॉर हैंडलूम्स’ (Tested for Handlooms) पहल की शुरुआत की है। ब्रांड ने अपनी एआई-पावर्ड (AI-powered) फ्रंट-लोड वॉशिंग मशीनों के माध्यम से हथकरघा वस्त्रों की देखभाल को सुलभ बनाकर भारतीयों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को अधिक बार पहनने और अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है।
भारत के विविध राज्यों की बुनाई परंपराएं—जैसे बनारसी सिल्क, पैठणी, पोचंपल्ली इकत, और असम का मूगा सिल्क—वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान रखती हैं। इसके बावजूद, इन कपड़ों की नाजुक बुनाई के कारण लोग इनके खराब होने के डर से इन्हें कम पहनते हैं और अधिकतर ड्राई-क्लीनिंग पर निर्भर रहते हैं। इस समस्या को हल करने के लिए गोदरेज ने अपनी मशीनों का भारत के 25 विभिन्न प्रकार के हथकरघा कपड़ों पर कड़ा परीक्षण किया है। मशीन का ‘जेंटल वॉश’ प्रोग्राम अब इन वस्त्रों को 25 धुलाई तक पूरी सुरक्षा के साथ धोने के लिए प्रमाणित है। इन परीक्षणों में धागों की मजबूती परखने के लिए 40x मैग्नीफिकेशन वाले माइक्रोस्कोप का उपयोग किया गया है।
गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के अप्लायंसेज़ डिवीज़न के बिज़नेस हैड कमल नंदी ने इस पहल पर कहा कि जब तकनीक परंपराओं से मिलती है, तभी हम अपनी महत्वपूर्ण धरोहर को सहेज सकते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी ‘डिज़ाइन्ड फॉर इंडिया’ वॉशिंग मशीनें भारतीयों को अपने सुंदर हथकरघा कपड़े आत्मविश्वास के साथ पहनने के लिए प्रेरित करेंगी। वहीं, मार्केटिंग हैड स्वाति राठी ने इस बात पर जोर दिया कि गोदरेज हमेशा से भारत की जरूरतों के अनुसार तकनीक विकसित करने के प्रति प्रतिबद्ध रहा है और यह पहल घर पर हथकरघा कपड़ों की देखभाल को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।


