नई दिल्ली : दक्षिण एशिया में स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने भूटान की 1,125 मेगावाट की दोरजिलुंग जलविद्युत परियोजना (DHPL) के लिए दीर्घकालिक वित्त पोषण को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत विकसित होने वाली यह भूटान की अब तक की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना है। डीएचपीएल (DHPL) एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) है, जिसमें भूटान की ‘ड्रुक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन’ (60%) और भारत की दिग्गज बिजली कंपनी ‘टाटा पावर’ (40%) की संयुक्त हिस्सेदारी है।
यह परियोजना क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा और भारत-भूटान के बीच गहरे स्वच्छ ऊर्जा सहयोग का प्रमाण है। इस संयंत्र से प्रतिवर्ष 4,500 GWh से अधिक स्वच्छ बिजली का उत्पादन होगा, जिसका लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा भारत को निर्यात किया जाएगा। टाटा पावर की सहायक कंपनी, ‘टाटा पावर ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड’, भारत में इस बिजली के आयात और कुशल वितरण प्रबंधन का कार्य संभालेगी। इस परियोजना के शुरू होने से भूटान की कुल स्थापित ऊर्जा क्षमता में लगभग 40 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि होने की उम्मीद है।
विश्व बैंक द्वारा स्वीकृत वित्तीय पैकेज काफी व्यापक है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय विकास संघ (IDA) से $300 मिलियन (अनुदान और ऋण), अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (IBRD) से भूटान सरकार को $15 मिलियन और परियोजना (DHPL) को $200 मिलियन का ऋण शामिल है। इसके अतिरिक्त, अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (IFC) से $300 मिलियन का ऋण प्रदान किया जाएगा, जबकि शेष राशि अन्य बाजार भागीदारों द्वारा जुटाई जाएगी। विश्व बैंक की यह स्वीकृति न केवल परियोजना की वित्तीय नींव को मजबूती देती है, बल्कि भूटान के मोंग़र और ल्हुंतसे जिलों में रोजगार सृजन और स्थानीय आर्थिक विकास का मार्ग भी प्रशस्त करती है।
