Tuesday, November 3, 2026
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यूरोस्कूल एचएसआर ने ‘तिरंगा 2026’ के साथ मनाया गणतंत्र दिवस; ‘तकनीक और परंपरा’ के संगम से छात्रों ने दिखाई प्रतिभा

बेंगलुरु : भारत के अग्रणी के-12 (K–12) स्कूल नेटवर्कों में से एक, यूरोस्कूल ने अपने एचएसआर कैंपस में ‘तिरंगा – गणतंत्र दिवस उत्सव 2026’ का शानदार आयोजन किया। इस वर्ष का उत्सव “टेक एन ट्रेडिशन” (Tech n’ Tradition) यानी ‘तकनीक और परंपरा’ की अनूठी थीम पर आधारित था, जिसका उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भविष्य के तकनीकी नवाचारों के साथ जोड़ना था। इस व्यापक अंतर-स्कूली प्रतियोगिता में प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के सैकड़ों छात्रों ने ऑन-कैंपस और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से हिस्सा लिया। यह आयोजन न केवल गणतंत्र दिवस के महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि छात्रों के बीच रचनात्मकता, आत्मविश्वास और अनुभवात्मक शिक्षा (experiential learning) को बढ़ावा देने के लिए एक समावेशी मंच भी प्रदान करता है।

इस उत्सव के तहत विभिन्न आयु वर्गों के लिए विविध गतिविधियों का आयोजन किया गया था। जहाँ प्री-प्राइमरी के नन्हे छात्रों ने ‘हैप्पी फीट’ और ‘मोल्डिंग माइंड्स’ जैसी क्रियाओं के माध्यम से अपनी मासूमियत बिखेरी, वहीं कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों ने ‘इंडिया आइकन्स’ और ‘इको हीरो’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए राष्ट्रीय गौरव और स्थिरता (sustainability) का संदेश दिया। वरिष्ठ छात्रों (कक्षा 6 से 12) के लिए तकनीक और गहन सोच पर केंद्रित प्रतियोगिताएं जैसे ‘इन्वेंटिया’, ‘पिच भारत’ (Pitch Bharat), और ‘बाइनरी बैटल’ आकर्षण का केंद्र रहीं। ‘इंडिया ऑन रील्स’ और ‘डिजिटल एरेना’ जैसे सत्रों ने छात्रों को अपनी डिजिटल रचनात्मकता प्रदर्शित करने का अवसर दिया, जो आधुनिक समय की शिक्षा पद्धतियों के साथ पूर्णतः मेल खाता है।

यूरोस्कूल एचएसआर की प्रिंसिपल, सुश्री कविता नीलायत ने इस पहल की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ‘तिरंगा उत्सव 2026’ को एक ऐसे मंच के रूप में तैयार किया गया था जहाँ छात्र भविष्य के प्रगतिशील विचारों के साथ जुड़ते हुए अपनी जड़ों और परंपराओं का सम्मान करना सीख सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक और परंपरा का यह मेल न केवल छात्रों में सहयोग की भावना विकसित करता है, बल्कि उन्हें कक्षा की दीवारों से बाहर अपनी वास्तविक क्षमता खोजने के लिए प्रेरित भी करता है। यह आयोजन एक आधुनिक और प्रगतिशील भारत के निर्माण में शिक्षा और संस्कृति के समन्वय के महत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

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