डिंडौरी/ शैलेश नामदेव / खबर डिजिटल/ प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही और वेयर हाउस संचालकों की मनमानी के चलते करीब 27 करोड़ रुपये का चावल सड़ गया। डिंडौरी जिले में 5800 क्विंटल चावल खराब हो गया। कलेक्टर ने राइस मिलर व वेयर हाउस संचालकों के खिलाफ कार्यवाही किये जाने के लिए महाप्रबंधक गुणवत्ता निरीक्षक मिलिंग मप्र स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन को पत्र भेज दिया है। मिलिंग नीति के अनुसार जिम्मेदारों मिलरों पर चार गुना पेनाल्टी लगाये जाने और तीन साल के लिए ब्लेक लिस्ट किये जाने का प्रावधान बताया गया है। ऐसे में अनुमानित करीब 70 से 80 करोड़ रुपये का जुर्माना अब जिले के 5 राइस मिलर्स संचालको पर लगाया जा सकता है।
जानकारी के अनुसार कलेक्टर ने यह कार्यवाही तब की जब कई नोटिस देने के बाद भी मिलर्स द्वारा चावल को अपग्रेड व रिप्लेस करने का कोई प्रयास नहीं किया गया। वहीं नोटिस के जबाव में एक राइस मिलर्स ने अपना उत्तर देते हुए बताया कि देखरेख न होने के कारण जमा चावल में कीड़े लग चुके है और इसे अपग्रेड करने पर इसे चावल नहीं बल्कि पाउडर निकलेगा। इससे तय हो चुका है कि करीब 58 हजार क्विंटल चावल पूरी तरीके से खराब हो गया है।
भोपाल की टीम कर चुकी है निरीक्षण
गौरतलब है कि जिले में करीब 6800 मैट्रिक टन चावल के खराब होने की शुरूआत दिसम्बर 2024 में तब आई थी जब इसमें लंपी लगने की जानकारी दी गई थी। जिसके बाद जुलाई और अगस्त में जबलपुर की क्षेत्रीय और भोपाल की गुणवत्ता नियंत्रक टीम ने वेयर हाउस में इन चावलों की आकर जांच की। जिसके मिले प्रतिवेदन के बाद लगातार राइस मिलर्स को चावल रिप्लेस व ग्रेडेशन करने के लिए निर्देशित किया जाता रहा, लेकिन लापरवाह मिलर्स व वेयर हाउस संचालकों ने इनमें अनदेखी की और जिसका नतीजा यह रहा कि अब यह चावल पूरी तरीके से खराब हो कर पाऊडर में बदल चुका है। हालाकि एक दो मिलर्स ने निर्देश के बाद अपग्रेडशन करने की कार्यवाही की है यही कारण है कि 6800 मैट्रिक टन में से इसकी मात्रा घटकर 5800 मैट्रिक टन यानि 5800क्विंटल हो गया । लेकिन चावल बरबाद हो चुका है। चावलों में कीड़े लग गये हैं, जो कि खाने के लायक नहीं है। जिसकी रिकवरी अब सख्ती से की जाएगी।
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चार गुना पेनाल्टी लगाये जाने का प्रस्ताव
पाउडर बन चुके 5800 क्विंटल चावल को लेकर कलेक्टर ने राज्य की मिलिंग राशि एवं अपग्रेडेशन राशि की 04 गुना पेनाल्टी मिलर द्वारा देने के अलावा पत्र में लिखा है कि इसकी गणना मिलर द्वारा कॉर्पोरेशन को सीएमआर चावल जमा करने के उपरांत किसी भी स्तर पर किये गये गुणवत्ता निरीक्षण में बीआरएल पाये जाने पर ही की जायेगी। भंडारण केंद्र में मिलर द्वारा सीएमआर जमा किये जाने हेतु लाये जाने पर गुणवत्ता परीक्षण में पाये गये ऐसे बीआरएल स्कंध जो कि गोदाम में जमा किये जाने के पूर्व ही मिलर को वापस किया गया हो। इसे गणना में शामिल नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा भारत सरकार द्वारा सीएमआर के संबंध में जारी एसओपी का अनुपालन मिलर को भारत सरकार खाद्य मंत्रालय द्वारा पत्र का अनुपालन करना अनिवार्य होगा, जिसके अनुसार बीआरएल एवं वियोंड के निराकरण में कार्यवाही की जाएगी।
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इनका कहना
डिंडौरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने बताया कि मिलर से मिले जबाव के बाद उक्त चावल को लेकर महाप्रबंधक को पत्र भेजा गया है। जिसमें आवश्यक कार्यवाही के लिए लिखा गया है। अब इस प्रकरण में भोपाल से कार्यवाही की जाएगी।


