मंडी : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी ने देश की रक्षा क्षमताओं को स्वदेशी नवाचार से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। संस्थान के नॉर्थ कैंपस में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के सहयोग से ‘आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट’ पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण आयोजन का मुख्य उद्देश्य उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों में अकादमिक विशेषज्ञता और वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच समन्वय स्थापित करना था। कार्यक्रम के दौरान आईआईटी मंडी और डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ हाई-एल्टीट्यूड रिसर्च (डीआईएचएआर) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए गए, जो उच्च हिमालयी क्षेत्रों के लिए विशिष्ट प्रौद्योगिकियों और संयुक्त प्रशिक्षण पर केंद्रित होगा।
इस कार्यशाला में डीआरडीओ की प्रमुख प्रयोगशालाओं जैसे एचईएमआरएल, एआरडीई, टीबीआरएल और सीएफईईएस के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने शिरकत की। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने स्वदेशी अनुसंधान को व्यावहारिक रक्षा समाधानों में बदलने की संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई। वहीं, डीआरडीओ के महानिदेशक (आर्मामेंट एंड कॉम्बैट इंजीनियरिंग) डॉ. प्रतीक किशोर ने जोर देकर कहा कि आईआईटी जैसे संस्थान वैज्ञानिक गहराई के माध्यम से रक्षा अनुसंधान को नई दिशा देने में सक्षम हैं। उन्होंने आर्मामेंट प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए ऐसे सहयोगों को अनिवार्य बताया।
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में आर्मामेंट डिजाइन, बैलिस्टिक्स, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई एनर्जी मैटीरियल्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर गहन चर्चा की गई। एआरएमआरईबी (ARMRB) के समन्वयकों ने भविष्य की रक्षा जरूरतों और उनमें अकादमिक भागीदारी की संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दीं। यह पहल न केवल आईआईटी मंडी के शोध पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेगी, बल्कि अत्याधुनिक रक्षा नवाचार में भारत की वैश्विक स्थिति को भी सुदृढ़ करेगी।
