रीवा/ अरविंद तिवारी/ खबर डिजिटल/ मध्य प्रदेश के रीवा जिले अंतर्गत त्योंथर जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत अमिलिया इन दिनों विकास कार्यों के लिए नहीं, बल्कि मनरेगा (MGNREGA) में हुए एक अनोखे घोटाले के कारण चर्चा में है। यहां भ्रष्टाचार का ऐसा खेल खेला गया जहां स्कूल में पढ़ाई कर रहे 12वीं कक्षा के एक नाबालिग छात्र को कागजों पर मजदूर बना दिया गया और उसके नाम पर सरकारी राशि का गबन कर लिया गया।
सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक की ‘त्रिमूर्ति’ पर आरोप
इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक की संलिप्तता बताई जा रही है। आरोप है कि इन तीनों की मिलीभगत से कूटरचित (जाली) दस्तावेज तैयार किए गए और नाबालिग छात्र के नाम पर मस्टर रोल भरकर राशि आहरित कर ली गई। यह मामला तब प्रकाश में आया जब त्योंथर निवासी समाजसेवी ललित मिश्रा ने साक्ष्यों के साथ इसकी शिकायत कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और लोकायुक्त कार्यालय में दर्ज कराई।
जांच में पुष्टि, पर कार्रवाई नदारद
शिकायत के बाद जनपद पंचायत सीईओ द्वारा मामले की प्रारंभिक जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया कि नाबालिग के नाम पर भुगतान हुआ है और भ्रष्टाचार की शिकायत सही है। बावजूद इसके, महीनों बीत जाने के बाद भी दोषियों के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। फाइलों का ठंडे बस्ते में चले जाना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा कर रहा है।
कलेक्टर का आश्वासन
इस गंभीर मामले पर रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल का कहना है कि मामला संज्ञान में है और इसकी विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह है कि क्या रसूखदार दोषियों पर गाज गिरती है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।


