नई दिल्ली : केंद्रीय बजट 2026 भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए एक सुधारात्मक और भविष्योन्मुखी रोडमैप पेश करता है। वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच, इस बजट का मुख्य उद्देश्य छोटे व्यवसायों के लिए कार्यशील पूंजी (Working Capital) की उपलब्धता सुनिश्चित करना और ‘शी-मार्ट्स’ जैसी पहलों के माध्यम से महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को मुख्यधारा में लाना है। यह बजट केवल वित्तीय आवंटन तक सीमित नहीं है, बल्कि परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए संरचनात्मक बदलावों पर जोर देता है।
TReDS और वर्किंग कैपिटल प्रबंधन में सुधार बजट में TReDS (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) को मूल्य निर्धारण बेंचमार्क और सेटलमेंट प्लेटफॉर्म के रूप में सशक्त करने का प्रस्ताव है। यह कदम सीधे तौर पर उन छोटे व्यवसायों की मदद करेगा जो बड़ी कंपनियों की सप्लाई चेन का हिस्सा हैं, क्योंकि इससे भुगतान चक्र छोटा होगा और लिक्विडिटी में सुधार होगा। इसके अलावा, मैनपावर सप्लाई पर TDS नियमों को सरल बनाया गया है, जिससे लेबर-इंटेंसिव इकाइयों के लिए अनुपालन बोझ कम होगा और नकदी प्रवाह का सटीक पूर्वानुमान लगाना आसान हो जाएगा।
प्रमुख योजनाएं और औद्योगिक आधुनिकीकरण
- पूंजी तक पहुंच: ‘एमएसएमई ग्रोथ फंड’ और ‘सुदृढ़ आत्मनिर्भर भारत फंड’ के माध्यम से विस्तार के लिए तैयार व्यवसायों को आवश्यक फंड उपलब्ध कराया जाएगा।
- पारंपरिक सेक्टर: ‘नेशनल फाइबर स्कीम’ और ‘वस्त्र विस्तार योजना’ के जरिए टेक्सटाइल जैसे पारंपरिक उद्योगों की वैल्यू चेन को आधुनिक बनाया जा रहा है, ताकि वे वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बन सकें।
- महिला सशक्तिकरण: महिला उद्यमियों के लिए ‘शी-मार्ट्स’ (She-Marts) का शुभारंभ समावेशी उद्यमिता की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो आर्थिक भागीदारी में जेंडर गैप को कम करने का लक्ष्य रखता है।
गोदरेज कैपिटल के एमडी एवं सीईओ ने इस बजट को प्रगतिशील बताते हुए कहा कि TReDS को मजबूत करना छोटे व्यवसायों की पुरानी वर्किंग कैपिटल समस्या का सीधा समाधान है। उनके अनुसार, यह बजट लिक्विडिटी बढ़ाने और संस्थानों को भविष्य के लिए तैयार करने में सफल रहेगा, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और बढ़ेगी।


