घंसौर/ सिवनी/ मनोज नामदेव/ झाबुआ पावर प्लांट से निकलने वाली रॉक फ्लाई ऐश (राख) इन दिनों क्षेत्र के लिए काल बन गई है। ठेकेदार द्वारा पर्यावरण और सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे परिवहन ने जनजीवन नर्क बना दिया है। ओवरलोड डंपरों से गिरती राख और हवा में तैरते जहर ने लोगों की सांसें छीन ली हैं, लेकिन प्रशासन की चुप्पी मैनेजमेंट के खेल की ओर इशारा कर रही है।
धुआं होती सुरक्षा, सड़कों पर बिछा मौत का जाल
परिवहन के लिए तय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गाइडलाइंस का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। बिना तिरपाल ढके दौड़ते तेज रफ्तार डंपरों से पूरी सड़क राख की चादर में तब्दील हो गई है। इससे न केवल दृश्यता कम हुई है, बल्कि सड़कें फिसलन भरी होने से दोपहिया वाहन चालक आए दिन हादसों का शिकार हो रहे हैं।

फेफड़ों में घुलता जहर, अस्पतालों में बढ़ती भीड़
क्षेत्र में दमा, आंखों में जलन और त्वचा रोगों का ग्राफ खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। सबसे बुरा हाल बच्चों और बुजुर्गों का है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार के रसूख के आगे जिम्मेदार विभाग नतमस्तक हैं। नर्मदा परिक्रमा मार्ग पर भी इस प्रदूषण का गहरा साया है, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था और स्वास्थ्य दोनों आहत हो रहे हैं।
पत्रकार संघ ने भरी हुंकार, अब CM से आस
इस तानाशाही के खिलाफ मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ ने मोर्चा खोल दिया है। एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी गई है कि यदि अवैध परिवहन तुरंत बंद नहीं हुआ, तो उग्र आंदोलन होगा। अब थक-हारकर पीड़ित जनता मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर देख रही है। सवाल यह है कि क्या ‘मुनाफे की राख’ के नीचे दबे सिस्टम को मुख्यमंत्री जगा पाएंगे या जनता को अपनी सांसों के लिए खुद सड़क पर उतरना होगा?


