पुणे : कृषि और निर्माण उपकरण क्षेत्र की वैश्विक दिग्गज कंपनी सीएनएच ने अपने पुणे स्थित अत्याधुनिक विनिर्माण संयंत्र में ‘मेड इन इंडिया’ उन्नत कृषि मशीनरी का प्रदर्शन कर भारतीय कृषि के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। 2,80,000 वर्ग मीटर में फैला यह संयंत्र न केवल भारत के सबसे अधिक बिकने वाले गन्ना हार्वेस्टर और बेलर का निर्माण करता है, बल्कि यह सीएनएच के वैश्विक अनुसंधान और विकास (R&D) का भी एक प्रमुख केंद्र है। यहाँ तैयार की गई मशीनें भारतीय मिट्टी और जलवायु की विशिष्ट चुनौतियों को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई हैं, जो किसानों को बेहतर उत्पादकता और ईंधन की बचत का भरोसा देती हैं।
सीएनएच इंडिया के प्रेसिडेंट एवं मैनेजिंग डायरेक्टर नरेंद्र मित्तल ने इस अवसर पर कहा कि भारत के विकसित अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में खेती का मशीनीकरण उत्पादकता और स्थिरता के लिए अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि गन्ना हार्वेस्टर और स्मॉल स्क्वेयर बेलर श्रेणी में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी पहले से ही 50% से अधिक है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में इसी पुणे संयंत्र से भारत का पहला TREM-V उत्सर्जन मानकों वाला गन्ना हार्वेस्टर पेश किया गया था, जो पर्यावरण के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह संयंत्र न केवल घरेलू मांग को पूरा करता है, बल्कि यहाँ से निर्मित कंबाइन हार्वेस्टर और अन्य कृषि उपकरण वैश्विक बाजारों में भी निर्यात किए जा रहे हैं।
तकनीक के साथ-साथ कंपनी महाराष्ट्र में कौशल विकास और टिकाऊ खेती के लिए भी व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। युवाओं के लिए ड्रोन तकनीक, डिजिटल कृषि शिक्षा और फसल अवशेष प्रबंधन (पराली प्रबंधन) जैसे कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। पुणे संयंत्र को आईजीबीसी (IGBC) प्रमाणन प्राप्त है और यह अपनी ऊर्जा व जल संरक्षण प्रथाओं के माध्यम से कंपनी के 2030 स्थिरता रोडमैप का पालन कर रहा है। इसके साथ ही, कंपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए स्थानीय स्कूलों और स्वास्थ्य सेवाओं में भी सहयोग प्रदान कर रही है।
भारत में वर्तमान में गन्ना कटाई और फसल अवशेष प्रबंधन में मशीनीकरण का स्तर बेहद कम (क्रमशः 5% और 2% से कम) है, जिसे देखते हुए विकास की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। सीएनएच का पुणे संयंत्र इन संभावनाओं को हकीकत में बदलने के लिए ऐसी मशीनें तैयार कर रहा है जो किसानों और कृषि उद्यमियों को अधिक सक्षम बनाएंगी। अत्याधुनिक फैब्रिकेशन सुविधाओं और स्वचालित असेंबली लाइनों से लैस यह इकाई भारतीय कृषि के चौतरफा बदलाव का केंद्र बनकर उभरी है, जो खेती को अधिक लाभदायक और आधुनिक बनाने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है।


