सीहोर : वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय ने अमेरिका के प्रतिष्ठित जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय (व्हाइटिंग स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग) के सहयोग से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हैकाथॉन ‘हेल्थ-हैक 2026’ का सफल आयोजन किया। 10 से 12 फरवरी तक चले इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य “सभी के लिए स्वास्थ्य तक पहुँच में सुधार” विषय के अंतर्गत ऐसे तकनीकी समाधान विकसित करना था, जो किफायती, समावेशी और भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हों।
वैश्विक विशेषज्ञों का संगम और समावेशी विजन कार्यक्रम का उद्घाटन वीआईटी भोपाल के चांसलर डॉ. जी. विश्वनाथन के नेतृत्व में हुआ, जिसमें जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय की वाइस डीन डॉ. श्रीदेवी सरमा और एसोसिएट डीन डॉ. हेडी अलावी ने वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में इंजीनियरिंग और चिकित्सा के समन्वय पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि भविष्य की स्वास्थ्य सेवा केवल अत्याधुनिक उपकरणों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों के लिए सुलभ बनाना अनिवार्य है। इस दौरान टेलीमेडिसिन, एआई-आधारित डायग्नोस्टिक्स, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और बुजुर्गों की देखभाल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर गहन चर्चा की गई।
प्रतिभाओं का महाकुंभ और पुरस्कृत नवाचार इस हैकाथॉन में देश-विदेश के अग्रणी संस्थानों (IIT, NIT, सरकारी मेडिकल कॉलेज) की कुल 579 टीमों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 231 टीमें फाइनल राउंड के लिए वीआईटी भोपाल पहुँचीं। कड़े मुकाबले के बाद तीन सर्वश्रेष्ठ नवाचारों को चुना गया:
- प्रथम पुरस्कार (₹1,00,000): पारुल विश्वविद्यालय (गुजरात) की ‘टीम एटरनिया’ ने छात्रों के लिए एक सुरक्षित डिजिटल मानसिक स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म विकसित कर जीत हासिल की।
- द्वितीय पुरस्कार (₹50,000): खाजा बंधनवाज़ विश्वविद्यालय (कर्नाटक) की ‘टीम केबीएनयू-बी’ ने “स्वस्थपथ” नामक एआई-आधारित बहुभाषी हेल्थ स्कीम नेविगेटर पेश किया।
- तृतीय पुरस्कार (₹25,000): वीआईटी भोपाल की ‘टीम मेथक्साई’ ने 24×7 आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने वाला एआई-आधारित वेंडिंग सिस्टम तैयार किया।
निष्कर्ष और भविष्य की राह हैकाथॉन के संयोजक डॉ. सिद्धार्थ मैती और डॉ. सिद्धार्थ सिंह चौहान ने इस आयोजन को अकादमिक और उद्योग जगत के बीच एक सेतु बताया। डॉ. यूसेफ यज़्दी (जॉन्स हॉपकिन्स) ने विचार से व्यवसायीकरण तक की प्रक्रिया पर जोर देते हुए कहा कि स्केलेबल स्वास्थ्य समाधान ही वैश्विक आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं। इस सफल आयोजन ने वीआईटी भोपाल की शोध-आधारित शिक्षा और सामाजिक प्रभाव पैदा करने वाली तकनीक के प्रति प्रतिबद्धता को वैश्विक स्तर पर और मजबूत किया है।
प्रमुख उपलब्धियाँ:
- कुल प्रतिभागी: 2,767 छात्र (579 टीमें)
- सहयोग: जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय, अमेरिका
- फोकस क्षेत्र: एआई डायग्नोस्टिक्स, मेंटल हेल्थ, मातृ स्वास्थ्य, और किफायती चिकित्सा उपकरण।
- पुरस्कार राशि: ₹1.75 लाख (कुल नकद पुरस्कार)
