भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है, इसके बाद माना जा रहा है कि उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीतिक पारी की शुरुआत होने वाली है, उन्हें डिप्टी सीएम बनाकर बड़ा सियासी कद दिया जा सकता है, इसके बदले बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बना सकती है, क्योंकि बिहार में बीजेपी के पास जेडीयू से ज्यादा सीटें हैं, लेकिन आज हम बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश की, जहां पर बिहार सा नजारा दिखाई दे सकता है, यहां पर कई नेता पुत्र कतार में हैं कि आने वाले वक्त में उनकी भी राजनीतिक पारी की शुरुआत हो जाएगी।
कई नेता पुत्रों को बिहार पार्ट-टू का इंतजार
मध्यप्रदेश के बुदेलखंड से लेकर ग्वालियर चंबल तक बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं के बेटे अपनी पॉलिटिकल एंट्री के लिए कतार में हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में दिग्गज नेताओं के सियासी मोह के चलते दूसरे नेताओं के बेटों का पॉलिटिकल टेक ऑफ अभी तक नहीं हुआ है, लेकिन जिस तरह से बिहार में बीजेपी ने पीढ़ी परिवर्तन कराया है, ऐसे में एमपी में भी कयासबाजी शुरु हो चुकी है कि नेता पुत्रों को मध्यप्रदेश में जल्द ही मौका मिल जाएगा, और वो सियासत के पायदान चढ़ते नजर आएंगे।
इन इलाकों में पीढ़ी परिवर्तन की संभावना
पीढ़ी परिवर्तन के दौर में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे देवेंद्र प्रताप सिंह तोमर, पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के बेटे अभिषेक भार्गव, पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के बेटे सुकर्ण मिश्रा, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महाआर्यमन सिंधिया, पूर्व राज्यसभा सांसद प्रभात झा के बेटे तुष्मुल झा का नाम लिया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इनकी जल्द ही सियासी एंट्री हो जाएगी और बिहार पार्ट-टू दोहराया जाएगा।
परिवर्तनों के चलते रुकी नेता पुत्रों की एंट्री
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश के मुख्यमंत्री पद को छोड़कर केंद्रीय कृषि मंत्री बन गए, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर केंद्र की राजनीति छोड़कर वापस प्रदेश में आ गए, पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव अब महज एक वरिष्ठ विधायक हैं, पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा चुनाव हार गए, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी की राजनीति शुरु कर दी, इसी तरह पूर्व राज्यसभा सांसद प्रभात झा का दुखद निधन हो गया, इन्हीं सभी परिवर्तन के चलते नेता पुत्रों की सियासी एंट्री रुक गई।


