MP cabinet expansion: मध्यप्रदेश में एक बार फिर मंत्रिमंडल में विस्तार की सुगबुगाहट शुरु हो चुकी है, तमाम अटकलों पर विराम लगने की संभावना है, माना जा रहा है कि चैत्र नववर्ष प्रतिपदा या नवरात्रि में नए मंत्रियों की लिस्ट उजागर हो जाएगी, सीएम डॉ. मोहन यादव चार से छह मंत्रियों को मंत्रिमंडल में स्थान दे सकते हैं, इसी तरह करीब दो या तीन मंत्रियों को कैबिनेट से बाहर किया जा सकता है। जिसको लेकर मुख्यमंत्री और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की दिल्ली दौरे के दौरान आला नेताओं से चर्चा भी हो चुकी है।
जिसे अब अंजाम तक पहुंचा दिया जाएगा।
इनको बना सकते हैं मंत्री
मंत्रिमंडल के विस्तार में एक बार फिर सागर जिले में समन्वय बैठाने के लिए वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव को स्थान दिया जा सकता है, क्योंकि यहां से महज सिंधिया कोटे से गोविंद सिंह राजपूत मंत्री है। इसी तरह इंदौर में भी बैलेंस के लिए मालिनी गौड़ को मंत्री बनाया जा सकता है, क्योंकि इंदौर से एक ही कैलाश विजयवर्गीय मंत्री है। जबकि सिंधिया कोटे से बृजेंद्र सिंह यादव को मंत्री पद मिल सकता है। हालांकि सागर के समीकरण के आधार पर शैलेंद्र कुमार जैन, प्रदीप लारिया का नाम भी चर्चाओं में बना हुआ है। बात करें निमाड़ अंचल की तो बुरहानपुर से विधायक अर्चना चिटनिस को एक बार फिर मंत्री पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है, क्योंकि वो भी शिवराज मंत्रिमंडल में मंत्री रह चुकी हैं। आदिवासी कोटे ओमप्रकाश धुर्वे का नाम चर्चाओं में है। साथ ही नॉन परफॉर्मेंस और विवादित छवि वाले मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। वरिष्ठ मंत्रियों को राष्ट्रीय स्तर पर नई जिम्मेदारी नवाजा जा सकता है।
निगम-मंडल भी साथ में कर सकते हैं घोषित
मंत्रिमंडल विस्तार के आसपास ही निगम-मंडल, प्राधिकरण में भी नियुक्तियां की जा सकती है। ऐसे में संघ की तरफ से विनोद गोटिया, आशुतोष तिवारी का नाम चर्चाओं में बना हुआ है। जबकि अन्य नेताओं में रामनिवास रावत, इमरती देवी, कमल पटेल, चेतन सिंह, हरिनारायण यादव, आशीष अग्रवाल, केपी यादव, ध्रुव नारायण सिंह, महेंद्र सिंह सिसोदिया समेत अन्य नामों की चर्चाएं जोरों पर है, हालांकि अंतिम वक्त में संघ की तरफ से एक-दो नाम और भी बढ़ाए जा सकते हैं।
मोहन-हेमंत का दिल्ली दौरा था खास
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल कुछ दिन पहले दिल्ली के दौरे पर गए थे, इस दौरान उन्होंने पार्टी आलाकमान से चर्चा की थी, तभी से माना जा रहा था कि एक-दो दिन के भीतर निगम-मंडल और प्राधिकरण की सूची आ जाएगी। कहा जा रहा है कि इनमें केपी यादव समेत कुछ नामों पर दिल्ली में आपत्ति दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद सूची को रोक दिया गया। हालांकि अब एक बार फिर पुनर्विचार के बाद सूची फाइनल होने की कगार पर है, और सभी पक्षों से चर्चा के बाद सूची को जारी कर दिया जाएगा। जिसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में निगम-मंडल में नियुक्तियां हुए करीब एक के लगभग हो चुका है, लेकिन मध्यप्रदेश के नेता बांट ही जोह रहे हैं।


