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Friday, April 17, 2026
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मध्यप्रदेश में इन नेताओं का जा सकता है मंत्री पद… नए चेहरों को मिल सकता है मौका

किसी चाह, किसी की अलग राह

भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में काफी समय से मंत्रिमंडल में विस्तार की बात चल रही है, लेकिन हर बार मुहूर्त निकल जाता है, और विस्तार की बात अधूरी रह जाती है, लेकिन इस बार काफी मजबूती से सुगबुगाहट तेज हो चुकी है, क्योंकि आने वाले वक्त के अनुसार और पिछले घटनाक्रम को ध्यान में रखकर कहा जा रहा है कि यह अब संभव है। कुछ दिन पहले सीएम डॉ. मोहन यादव और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पार्टी के आला नेताओं से मुलाकात की थी, उसके बाद से कयास लगाए जाने लगे थे कि अबकी बार मंत्रिमंडल में फेरबदल संभव है, जिसके काउंटडाउन की अब शुरुआत बताई जा रही है, और नवरात्रि के आसपास यह संभव है। जिनमें से इन नेताओं का मंत्री पद जा सकता है।

कैलाश विजयवर्गीय
इंदौर के भागीरथपुरा जल कांड के बाद दूषित पानी को लेकर नगरीय विकास एवं आवास और संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कटघरे में है, इस दौरान उन्होंने एक पत्रकार के सवाल के जवाब में घंटा शब्द का उपयोग किया था, जोकि जमकर मीडिया में नकारात्मक छवि को उजागर कर गया था। इसके बाद मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के खिलाफ उन्होंने औकात शब्द का प्रयोग किया था। बाद में प्रदेश के भगोरिया उत्सव में भी दोनों के बीच जमकर तकरार हुई। उनके लिए कहा जा रहा है कि उन्हें मंत्रिमंडल से हटाकर चुनावी राज्यों में जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, हालांकि इसके पीछे उनकी मंशा भी बताई जा रही है, क्योंकि वो केंद्र की राजनीति से राज्य की सियासत में आकर खुद का डिमोशन मान रहे थे।

प्रहलाद सिंह पटेल
पूर्व सीएम उमा भारती के कट्टर समर्थक प्रहलाद सिंह पटेल मध्य प्रदेश बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं। वे कई बार दमोह लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं, और साल 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें नरसिंहपुर से उनके भाई जालम सिंह पटेल का टिकट काटकर उन्हें विधायकी का चुनाव लड़ाया था। इसके बाद मोहन सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री बनाया था, लेकिन अब उन्हें भी मंत्रिमंडल से हटाने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि कहा जा रहा है कि वो प्रदेश की राजनीति में घुटन महसूस कर रहे हैं, जिसकी इच्छा उन्होंने पार्टी आलाकमान के सामने कई बार जाहिर की जा चुकी है, नतीजतन उन्हें मंत्रिमंडल से हटाकर कोई और जिम्मेदारी दी जा सकती है।

दिलीप अहिरवार
दिलीप अहिरवार छतरपुर की चंदेला विधानसभा से जीतकर विधायक बने थे, इसके बाद वो मध्य प्रदेश सरकार में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री बने थे। उनके लिए कहा जा रहा है कि उन्हें खराब परफॉर्मेंस के चलते कैबिनेट से हटाकर कोई अन्य पद दिया जा सकता है, या फिर अगली बार के चुनाव के तैयारी के लिए विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय होने के लिए कहा जा सकता है।

राधा सिंह
राधा रवींद्र सिंह साल 2023 के विधानसभा चुनाव में चितरंगी विधानसभा से जीतकर विधायक बनी थीं। इसके बाद उन्हें पंचायत और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। उनके ससुर जगन्नाथ सिंह भाजपा में मंत्री पद में रहे हैं, और वे शिक्षा मंत्री हुआ करते थे। उनके बाद राजनीति की विरासत में उनकी बहू राधा सिंह आईं। राधा सिंह पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुकी है। उनको हटाकर किसी अन्य आदिवासी नेता को मंत्री बनाया जा सकता है।

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