भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए सरकार काफी समय से प्रयास कर रही है, लेकिन अब तक तमाम प्रयासों से हल नहीं निकल पाया है, ओबीसी आरक्षण के 27 प्रतिशत कोटे को लेकर लम्बे समय से कानूनी लड़ाई चल रही है, वहीं अब सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए
2020 बैच की आईएएस अधिकारी कविता बाटला को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें हाईकोर्ट में चल रहे आरक्षण से जुड़े सभी मामलों का प्रभारी अधिकारी (OIC) बना दिया गया है।
काफी समय से कोर्ट में चल रहा मामला
मध्यप्रदेश सरकार ने ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए अध्यादेश पेश किया था, हालांकि उसके बाद कोर्ट में तमाम याचिकाएं लगाई गई, तर्क दिया गया कि आरक्षण की कुल सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो जाएगी, जो सुप्रीम कोर्ट के जरिए स्थापित सीमा (इंदिरा साहनी केस, 1992) का उल्लंघन है। मई 2020 में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर स्टे (रोक) आदेश दे दिया, जिसके बाद से तमाम नियुक्तियों पर इसका असर पड़ा, और कई अटक गई।
6 साल से ओबीसी वर्ग का इंतजार
ओबीसी को साल 2019 तक 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल सका था, इसके बाद लाखों अभ्यर्थियों का चयन इसके माध्यम से हुआ, लेकिन कोर्ट में पिटिशन्स के कारण नियुक्ति पत्र के इंतजार में पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को इंतजार करना पड़ रहा है।हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने कई बार स्पष्ट किया है कि इस मामले में कोई रोक नहीं है। यदि राज्य सरकार चाहे तो नियुक्तियां कर सकती है, वहीं अब प्रकरणों के निपटारे के लिए नया प्रयास कर आईएएस अधिकारी कविता बाटला को जिम्मेदारी सौंपी गई है।


