भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी का विरोध अपने पूरे चरम पर पहुंच चुका है, इसको लेकर आंदोलन की गहरी रणनीति तैयार की जा रही है। शासकीय शिक्षक संगठन के बैनर तले सभी शिक्षकों के संगठनों और संघों को एक धागे में पिरोने की कोशिश जारी है। इसी के चलते 29 मार्च को राजधानी भोपाल में सभी शिक्षक संगठनों की संयुक्त बैठक का आयोजन किया जाएगा, जिसमें लंबित मांगों और टीईटी की अनिवार्यता को खत्म करने की मांग को लेकर आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।
शिक्षक संगठन ने दी जानकारी
भारतीय शिक्षक संगठन ने जानकारी देते हुए बताया कि एमपी में टीईटी परीक्षा को लेकर असंतोष की लहर है, इसी के चलते शिक्षकों संगठनों को एक मंच पर लाकर विरोध की रणनीति बनाई जाएगी, शिक्षकों की पहले से कई समस्याएं हैं, उनको हल करने की बजाय टीईटी की अनिवार्यता का नया नियम थोप दिया गया, जिसके चलते एक और नई परेशानी खड़ी हो गई, जबकि सरकार को शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना, पुरानी पेंशन बहाली, ई-अटेंडेंस व्यवस्था और टीईटी परीक्षा जैसे मुद्दों पर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
भर्ती के समय नहीं थी टीईटी की अनिवार्यता
जानकारी के मुताबिक लोक शिक्षण संचालनालय ने 2 मार्च 2026 को जारी आदेश में प्रदेश के लाखों शिक्षकों को टीईटी की परीक्षा पास करने के निर्देश दिए थे। इस आदेश के बाद शिक्षकों में भारी नाराजगी है, क्योंकि प्रदेश में वे पिछले 20 से 27 वर्षों से संविदा शाला शिक्षक और शिक्षाकर्मी के रुप में सेवाएं दे रहे हैं, जबकि भर्ती के समय टीईटी का प्रावधान नहीं था, तो अब क्यों लागू किया जा रहा है। जिस तरह से शिक्षाकर्मी भर्ती अधिनियम 1997-98, अध्यापक भर्ती अधिनियम 2008 और राज्य शिक्षा सेवा भर्ती अधिनियम 2018 में भी सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा अनिवार्य करने का उल्लेख नहीं किया गया था।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का दिया हवाला
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के एक निर्णय में यह स्पष्ट किया गया है कि किसी कर्मचारी की भर्ती के बाद उसकी सेवा शर्तों में परिवर्तन नहीं किया जा सकता है।


