Tuesday, November 3, 2026
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सीडीएसएल और केपीएमजी इन इंडिया की रिपोर्ट में भारत के सिक्योरिटीज़ मार्केट में डेटा-आधारित बदलाव की मांग, ‘3सी’ फ्रेमवर्क का प्रस्ताव

मुंबई : एशिया की पहली लिस्टेड डिपॉजिटरी सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज़ (इंडिया) लिमिटेड (“सीडीएसएल”) ने  केपीएमजी इन इंडिया के साथ मिलकर अपनी रीइमेजिन थॉट लीडरशिप रिपोर्ट का तीसरा एडिशन जारी किया है। इस रिपोर्ट का शीर्षक है “रीइमेजिन: सिक्योरिटीज़ मार्केट थ्रू डेटा सिनर्जी”, यह इस साल की शुरुआत में हुई तीसरी सालाना रीइमेजिन सिम्पोजियम के बाद आई है। रिपोर्ट में इसमें भारत के प्रतिभूति बाजार में डेटा-आधारित परिवर्तन के लिए एक क्रिएशन-कंट्रोल-कल्चर (3सी) फ्रेमवर्क का प्रस्ताव दिया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि “डेटा जोखिम ही बाजार जोखिम है”, और यह बताया गया है कि एक संरचित डेटा गवर्नेंस दृष्टिकोण भारत के प्रतिभूति बाजार में मजबूती, पारदर्शिता और नवाचार को बढ़ा सकता है। इसमें सुझाया गया 3सी फ्रेमवर्क बाजार संस्थानों को साझा डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने, मजबूत गवर्नेंस और साइबर सुरक्षा उपाय लागू करने तथा जिम्मेदार डेटा उपयोग की संस्कृति विकसित करने में मदद करेगा। रिपोर्ट में एक केंद्रीय नियामकीय संचालन मॉडल का भी सुझाव दिया गया है, जिससे नियामकीय अपेक्षाओं का बेहतर समन्वय, विभिन्न प्रतिभागियों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी में सुधार और जोखिम प्रबंधन व निवेशक संरक्षण को मजबूत किया जा सके।

सीडीएसएल के एमडी और सीईओ श्री नेहल वोरा ने कहा, “डेटा सिनेर्जी वह शक्ति है जो क्रिएशन, कंट्रोल और कल्चर को जोड़ती है—यह नवाचार को बढ़ावा देने के साथ विश्वास को भी मजबूत करती है। जब डेटा इंटेलीजेंट और इंटरऑपरेबल बनता है, तो यह एक ऐसा बाजार तैयार करता है जो स्वभाव से ही मजबूत और भरोसेमंद होता है। ऐसा इकोसिस्टम केवल लेन-देन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ‘आत्मनिर्भर निवेशक’ को सशक्त बनाता है और भारत को ‘विकसित भारत’ की दिशा में आगे बढ़ाता है।”

भारत का प्रतिभूति बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है और निवेशकों की भागीदारी बढ़ रही है। वर्तमान में घरेलू भागीदारी लगभग 20% के आसपास है, जो कि अमेरिका जैसे विकसित बाजारों की तुलना में काफी कम है, लेकिन इसमें आगे बढ़ने की बड़ी संभावनाएं हैं। बढ़ती निवेशक संख्या वित्तीय समावेशन और निवेशक जागरूकता को मजबूत करने का अवसर प्रदान करती है।

इसके अलावा, रिपोर्ट में चार खास मौके वाले एरिया बताए गए हैं जहां डेटा इकोसिस्टम को बदल सकता है: मज़बूत प्राइस डिस्कवरी और क्यूरेटेड प्रोडक्ट्स, बड़े पैमाने पर पर्सनलाइज़्ड इन्वेस्टर एक्सपीरियंस, बेहतर रिस्क इंटेलिजेंस और फ्रॉड की रोकथाम, और रेगुलेटरी टेक्नोलॉजी (रेगटेक) और सुपरवाइजरी टेक्नोलॉजी (सुपटेक) के जरिये ज़्यादा तेज़ सुपरविज़न।

रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए, केपीएमजी इन इंडिया के पार्टनर और नेशनल लीडर, क्लाइंट्स एंड मार्केट्स, श्री अखिलेश टुटेजा ने कहा: “इंसानी इंटेलिजेंस ने मॉडर्न इकॉनमी को आगे बढ़ाया है; विकास का अगला दौर इस बात पर निर्भर करेगा कि हम इंटेलिजेंट डेटा का कितना अच्छा इस्तेमाल करते हैं। जैसा कि यह रिपोर्ट बताती है, डेटा रिस्क ही मार्केट रिस्क है। डेटा को कोर मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर मानना ​​भारत के लिए मार्केट लीडरशिप और इन्वेस्टर का भरोसा बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी है।”

प्रस्तावित 3सी फ्रेमवर्क एक भरोसेमंद डेटा इकोसिस्टम बनाने के लिए एक व्यवस्थित राह बताता है:

  • क्रिएशन भारत की मार्केट डेटा डिक्शनरी, मशीन-रीडेबल डिस्क्लोजर, सुरक्षित एपीआई पाइपलाइन और प्राइवेसी-प्रिजर्विंग सिमुलेशन एनवायरनमेंट सहित शेयर्ड यूटिलिटी बनाने की क्षमता का जश्न मनाता है, जो पूरे इकोसिस्टम में रिसर्च और प्रोडक्ट इनोवेशन को अनलॉक करता है।
  • कंट्रोल स्मार्ट गार्डरेल के साथ सिस्टम को मजबूत करता है, जिसमें प्राइवेसी-बाय-डिज़ाइन, स्टैंडर्डाइज्ड लाइनेज, साइबर रेजिलिएंस प्रोग्राम (पोस्ट-क्वांटम रेडीनेस सहित), और जिम्मेदार एआई गवर्नेंस (इंडस्ट्री-वाइड एआई मॉडल रजिस्ट्री के विज़न सहित) शामिल हैं। ये कंट्रोल इसे सस्टेनेबल और भरोसेमंद बनाकर प्रोग्रेस को तेज करते हैं।
  • कल्चर डेटा क्वालिटी, एक्सप्लेनेबिलिटी, रिस्पॉन्सिवनेस और इन्वेस्टर आउटकम से इंसेंटिव को जोड़कर और मल्टीलिंगुअल इन्वेस्टर एजुकेशन को बढ़ाकर ट्रांसफॉर्मेशन को ड्यूरेबल बनाता है जो अवेयरनेस को कॉन्फिडेंट पार्टिसिपेशन में बदलता है।

रिपोर्ट में रीइमेजिन: सिक्योरिटीज मार्केट थ्रू डेटा सिनर्जी सिंपोजियम से मिली जानकारी भी शामिल है, जिसमें सेबी के चेयरमैन श्री तुहिन कांता पांडे चीफ गेस्ट के तौर पर, और सेबी के होल-टाइम मेंबर श्री संदीप प्रधान, और एचडीएफसी के पूर्व वाइस चेयरमैन और सीईओ श्री केकी मिस्त्री गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर शामिल हुए थे। इस सिंपोजियम में सिक्योरिटीज मार्केट, फाइनेंशियल सर्विसेज़ और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम के लीडर्स एक साथ आए, जिसमें पैनल डिस्कशन में “डेटा की सुपरपावर – बड़े पैमाने पर इनोवेशन को बढ़ावा देना,” “डेटा कैपिटल है – ट्रस्ट करेंसी है,” और “डेटा डीएनए के तौर पर – एक कल्चरल बदलाव” जैसे विषयों पर बात हुई।”

जैसे-जैसे डेटा फाइनेंशियल मार्केट की रीढ़ बनता जा रहा है, रिपोर्ट में रेगुलेटर्स, मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशन्स, इंटरमीडियरीज़ और इन्वेस्टर्स के बीच मिलकर काम करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है ताकि एक मज़बूत और भरोसेमंद डेटा इकोसिस्टम बनाया जा सके जो भारत के विकसित भारत के दृष्टिकोण का समर्थन कर सके।

लिंक: https://www.cdslindia.com/Publications/Thought%20Leadership%20Reports.html

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