कमलेश जाटवा/ खबर डिजिटल/उज्जैन/ जिले में चैत्र नवरात्रि की महाष्टमी पर आज आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। राजा विक्रमादित्य के काल से चली आ रही नगर पूजा की प्राचीन परंपरा का निर्वाह करते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और जिला प्रशासन ने नगर की सुख-समृद्धि के लिए देवी को मदिरा का भोग लगाया।
चौबीस खंबा माता मंदिर से हुई शुरुआत
सुबह 8 बजे ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच प्रसिद्ध चौबीस खंबा माता मंदिर में महाआरती का आयोजन हुआ। यहां अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज (निरंजनी अखाड़ा) ने देवी महालया और महामाया का पूजन कर मदिरा अर्पित की। ऐतिहासिक मान्यता है कि प्राचीन काल में राजा विक्रमादित्य स्वयं यह पूजा करते थे। वर्तमान में चैत्र नवरात्रि में यह दायित्व अखाड़ा परिषद अध्यक्ष और अश्विन नवरात्रि में जिला कलेक्टर निभाते हैं।
मदिरा की अखंड धार और 19 किमी की यात्रा
महापूजा के बाद तहसीलदार के नेतृत्व में प्रशासनिक अमला और श्रद्धालु नगर भ्रमण पर निकले। यात्रा की सबसे खास बात मदिरा की धार है। एक विशेष घड़े (कलश) में छेद कर मदिरा भरी जाती है, जिससे पूरी यात्रा के दौरान सड़क मार्ग पर मदिरा की अखंड धार बहती रहती है। लगभग 19 किलोमीटर लंबी यह यात्रा शहर के विभिन्न देवी मंदिरों से होकर गुजरती है, जहां माता को मदिरा का भोग लगाया जाता है।
महाकालेश्वर मंदिर पर शिखर ध्वज के साथ समापन
इस पैदल यात्रा में अखाड़ा परिषद के साधु-संत, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मार्ग में कई भक्तों ने इस मदिरा को प्रसाद के रूप में ग्रहण भी किया। शाम को यह यात्रा ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर मंदिर पहुंचती है, जहां शिखर पर ध्वज चढ़ाकर सुख-शांति और खुशहाली की कामना के साथ पूजा का समापन होता है।


