RTE Admission 2026: छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार RTE के तहत गरीब बच्चों के स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू होते ही घमासान मच गया है। एक ओर अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य के लिए निजी स्कूलों के चक्कर काट रहे हैं, तो दूसरी ओर प्रदेश के कई निजी स्कूल संचालक फीस बढ़ाने की मांग को लेकर अड़ गए हैं। इसी बीच साय सरकार ने एक्शन लेते हुए स्कूलों को चेतावनी दे दी है।
क्या है विवाद ?
दरअसल, प्रदेश के हजारों निजी स्कूल इस साल आरटीई के तहत प्रवेश देने में आनाकानी कर रहे हैं। स्कूल प्रबंधनों का कहना है कि सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रति बच्चा राशि वर्तमान खर्चों के मुकाबले काफी कम है। जब तक सरकार फीस की राशि में बढ़ोतरी नहीं करती, वे नए दाखिले नहीं देंगे। सीएम विष्णुदेव साय की सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि शिक्षा का अधिकार हर बच्चे का हक है और आर्थिक तंगी के चलते किसी बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।
क्या कहता है नियम?
साल 2010 से बने इस कानून के तहत हर निजी स्कूल को अपनी 25 फीसदी सीटें आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए आरक्षित रखनी अनिवार्य हैं। छत्तीसगढ़ सरकार वर्तमान में कक्षा 1 से 5 तक के प्रति छात्र के लिए लगभग 7,000 रुपये और कक्षा 6 से 8 तक के लिए 11,400 रुपये सालाना भुगतान करती है।
रद्द हो सकती है मान्यता
शिक्षा विभाग ने अब निजी स्कूलों पर सख्त रुख अपनाते हुए नए दिशा निर्देश जारी किए हैं। विभाग के अनुसार आरटीई प्रवेश प्रक्रिया में बाधा डालने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित स्कूल की मान्यता को रद्द किया जा सकता है।
अभिभावकों की बढ़ी चिंता
स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया में हो रही देरी और स्कूलों के रवैये ने हजारों पालकों की नींद उड़ा रखी है। कई जिलों में अभिभावकों ने कलेक्टोरेट पहुंचकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की है।
