डिंडौरी/ शैलेश नामदेव/ खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले से शिक्षा व्यवस्था की एक विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है। विकासखंड समनापुर के अंतर्गत आने वाले ग्राम भालापुरी बसाहट, शिकारीटोला में सरकारी स्कूल का भवन न होने के कारण बच्चे पिछले दो वर्षों से खुले आसमान और घास-फूस के छप्पर के नीचे बैठकर शिक्षा लेने को मजबूर हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर क्षेत्र के समस्त ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को एक भावुक आवेदन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।
शिकारीटोला के ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव में संचालित शासकीय प्राथमिक शाला का पुराना भवन शासन के आदेशानुसार दो साल पहले ‘डिस्मेंटल’ (ध्वस्त) कर दिया गया था। नियमतः पुराने भवन को तोड़ने के साथ ही नए भवन का निर्माण कार्य शुरू हो जाना चाहिए था, लेकिन विडंबना यह है कि दो साल बीत जाने के बाद भी यहां ईंट की एक दीवार तक नहीं खड़ी की गई है।
भीषण गर्मी और बारिश का डर
वर्तमान में पूरा क्षेत्र भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। ऐसे में टीन की चादरों या घास के छप्पर के नीचे बैठकर पढ़ाई करना बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ”अभी तो तेज धूप और गर्म हवाओं से सब परेशान है, लेकिन दो महीने बाद जब बारिश शुरू होगी, तब बच्चों को बैठाना मुश्किल हो जाएगा। स्कूल में 50 से अधिक बच्चे दर्ज हैं, जिनकी सुरक्षा और भविष्य दांव पर लगा है।”
कलेक्टर को सौंपे गए पत्र में ग्रामीणों ने इस बात पर रोष जताया है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए या नया भवन स्वीकृत किए बिना पुराने भवन को क्यों तोड़ा गया? पालकों का कहना है कि उन्होंने अपने स्तर पर बच्चों के बैठने के लिए जैसे-तैसे छप्पर की व्यवस्था तो की, लेकिन यह कोई स्थाई समाधान नहीं है।
शिकारीटोला के समस्त निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि शासकीय प्राथमिक शाला के नवीन भवन के निर्माण हेतु तत्काल राशि स्वीकृत की जाए। वर्षा ऋतु शुरू होने से पहले निर्माण कार्य की नींव रखी जाए ताकि बच्चों का शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो।जब तक भवन नहीं बनता, तब तक बच्चों के बैठने के लिए किसी सुरक्षित सरकारी भवन या वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था की जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो उनके बच्चों का भविष्य अंधकार में डूब जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इन मासूम बच्चों की पुकार सुनकर कब तक कार्रवाई करता है।


