घंसौर/सिवनी/ खबर डिजिटल/ मनोज नामदेव/ सिवनी जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित घंसौर तहसील की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत घंसौर इन दिनों प्रशासनिक अव्यवस्था का शिकार बनी हुई है। ग्राम पंचायत सचिव के इस्तीफे के बाद सरपंच और उपसरपंच द्वारा पंचायत भवन में ताला लगा दिए जाने से पिछले तीन दिनों से सभी शासकीय कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। इस स्थिति के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्राम पंचायत भवन के मुख्य द्वार पर एक बैनर भी लगाया गया है, जिसमें लिखा है कि “सचिव की अनुपस्थिति में नवीन सचिव की पदस्थापना तक ग्राम पंचायत कार्यालय अनिश्चितकालीन के लिए बंद रहेगा।” इस निर्णय के चलते जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, पेंशन, मनरेगा भुगतान, राशन संबंधी कार्य सहित अन्य जरूरी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें छोटे-छोटे कामों के लिए भी कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है।
मामले को लेकर प्रशासन भी सख्त नजर आ रहा है। घंसौर तहसीलदार अरुण भूषण दुबे ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी शासकीय कार्यालय को बंद करना या उस पर ताला लगाना पूरी तरह अवैध है। उन्होंने कहा कि “शासकीय कार्यालय पर ताला लगाने का अधिकार किसी भी जनप्रतिनिधि को नहीं है, इस मामले में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
वहीं दूसरी ओर, ग्राम पंचायत सरपंच का कहना है कि सचिव के बिना पंचायत के कार्य सुचारू रूप से संचालित करना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि जनपद पंचायत सीईओ से लगातार नए सचिव की नियुक्ति की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। इसी कारण मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा।
ग्राम पंचायत पेसा एक्ट अध्यक्ष ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना या बैठक के इस तरह का निर्णय लेना गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत के पदाधिकारियों की “हिटलरशाही” के कारण आम जनता को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।
स्थानीय भाजपा नेता ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं को जल्द से जल्द दूर करने के लिए वे मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और एसडीएम से चर्चा करेंगे। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर पंचायत कार्यालय को खुलवाने की मांग की है।
गौरतलब है कि ग्राम पंचायत में सहायक सचिव और अन्य कर्मचारी भी मौजूद रहते हैं, जो आवश्यक कार्यों को जारी रख सकते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि केवल सचिव के इस्तीफे के कारण पूरे कार्यालय को बंद करना कितना उचित है।
फिलहाल, पंचायत प्रतिनिधियों के इस कदम से आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और कब तक ग्राम पंचायत के ताले खुलते हैं।


