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स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही उजागर, कलेक्टर की सख्ती के बाद मचा हड़कंप

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अनुपस्थित कर्मचारी, कमजोर प्रगति और मातृ मृत्यु मामलों में लापरवाही—वेतन कटौती व सेवा समाप्ति तक की नौबत

खबर डिजिटल कटनी, 10 अप्रैल:--जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में सामने आया कि कई योजनाएं कागजों तक सीमित हैं, जबकि मैदानी स्तर पर भारी लापरवाही बरती जा रही है। स्थिति इतनी गंभीर रही कि कलेक्टर आशीष तिवारी को सख्त रुख अपनाते हुए कर्मचारियों की सेवा समाप्ति, वेतन कटौती और नोटिस जारी करने के निर्देश देने पड़े।बिना सूचना गायब कर्मचारी, कार्रवाई के निर्देशबैठक में खुलासा हुआ कि उप स्वास्थ्य केंद्र मोहतरा (बहोरीबंद) के सीएचओ कृष्णम विश्वकर्मा बिना सूचना के अनुपस्थित पाए गए, जिस पर सेवा समाप्ति का नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। रीठी की सीएचओ सारिका यादव की कार्यप्रणाली भी संतोषजनक नहीं पाई गई, जिन्हें अंतिम चेतावनी दी गई है।इसी तरह बड़वारा की एएनएम अर्चना दाहिया, पिपरिया परौहा की सीएचओ मीनाक्षी बर्मन और हरदुआ कन्हवारा के सीएचओ राहुल मकवाने पर भी वेतन कटौती की कार्रवाई हुई, जो स्वास्थ्य विभाग की अंदरूनी लापरवाही को उजागर करती है।मातृ मृत्यु पर गंभीर सवालविजयराघवगढ़ में हुई मातृ मृत्यु ने स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल दी। जिम्मेदार आशा, एएनएम और सीएचओ द्वारा समय पर कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करने के कारण इस गंभीर घटना पर उनकी वेतन वृद्धि रोकने और नोटिस जारी करने की कार्रवाई की गई।टीकाकरण और निगरानी में भी ढिलाईकिशोरियों के एचपीवी टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं के पंजीयन जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भी अपेक्षित प्रगति नहीं मिल पाई। कई क्षेत्रों में वैक्सीन का असंतुलित वितरण और डेटा प्रबंधन की खामियां सामने आईं।निक्षय अभियान भी प्रभावितनिःक्षय 2.0 अभियान के तहत चिन्हित 244 ग्रामों में अपेक्षित कार्य नहीं होने पर कलेक्टर को विशेष शिविर लगाने के निर्देश देने पड़े, जिससे साफ है कि पहले से चल रहे प्रयास पर्याप्त नहीं थे।निजी क्लीनिकों की मनमानीनिजी नर्सिंग होम और सोनोग्राफी केंद्रों द्वारा एएनसी जांच की जानकारी समय पर जमा नहीं करना भी सामने आया, जिस पर प्रशासन को सख्त निर्देश जारी करने पड़े।प्रसव केंद्र बने निष्क्रियग्रामीण क्षेत्रों में प्रसव केंद्रों की स्थिति भी चिंताजनक पाई गई। बहोरीबंद और उमरियापान के कई केंद्र लंबे समय से निष्क्रिय हैं, जिससे स्थानीय महिलाओं को सुविधाओं के लिए भटकना पड़ रहा है।समापन:बैठक में सामने आई खामियां यह संकेत देती हैं कि स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं का क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर कमजोर है। कलेक्टर की सख्ती के बाद भले ही हलचल तेज हुई हो, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सुधार स्थायी होगा या फिर हालात पहले जैसे ही बने रहेंगे।

कटनी से खबर डिजिटल के लिए सौरभ श्रीवास्तव संवाददाता

मो. 9131308097

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