डिंडोरी /खबर डिजिटल/ शैलेश नामदेव/ किसलपुरी, डिंडोरी स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और जिम्मेदारों के कथित संरक्षण के चलते अमरपुर विकासखंड में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ का बड़ा मामला सामने आया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) किसलपुरी में पदस्थ एक सरकारी कंपाउंडर, विभाग के नियमों को ताक पर रखकर पिछले 6 वर्षों से सक्का कस्बे में अवैध क्लीनिक का संचालन कर रहा है।
किसलपुरी में भगवान दास वर्तमान में कंपाउंडर के पद पर कार्यरत हैं। विभाग ने उन्हें वैक्सीनेशन और ऑक्सीजन प्लांट की देखरेख जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं। लेकिन सूत्रों की मानें तो भगवान दास सरकारी ड्यूटी के समय ही, विशेषकर प्रत्येक बुधवार को सक्का कस्बे में अपनी निजी क्लीनिक खोलकर बैठ जाते हैं। बुधवार को क्षेत्र में लगने वाले हाट-बाजार का फायदा उठाकर वे इलाज के नाम पर भोले-भाले ग्रामीणों से मोटी रकम वसूल रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि आरोपी कंपाउंडर अपनी सरकारी पदस्थापना का उपयोग मरीजों को बरगलाने के लिए करता है। जब भी कोई ग्रामीण इलाज के लिए सरकारी अस्पताल पहुंचता है, तो भगवान दास उन्हें बेहतर उपचार का झांसा देकर अपने निजी क्लीनिक पर आने की सलाह देता है। बिना किसी वैध डिग्री या विशेषज्ञता के, वे गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को भारी मात्रा (Heavy Dose) में अंग्रेजी दवाइयां दे रहे हैं, जिससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।
विभागीय गलियारों में चर्चा है कि भगवान दास के परिवार की एक बड़े राजनीतिक दल में मजबूत पकड़ है। शायद यही वजह है कि 6 साल बीत जाने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग या जिला प्रशासन ने उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। जहाँ एक ओर प्रशासन ‘झोलाछाप’ डॉक्टरों के खिलाफ अभियान चलाने का दावा करता है, वहीं विभाग के भीतर ही चल रहे इस काले कारोबार पर जिम्मेदारों ने अपनी आँखें मूँद रखी हैं।
इस पूरे प्रकरण पर अमरपुर के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) डॉ. एस. एस. मरकाम का कहना है कि विभाग ने किसी भी कर्मचारी को निजी प्रैक्टिस की अनुमति नहीं दी है। एलोपैथिक या आयुर्वेदिक प्रैक्टिस के लिए सीएमएचओ (CMHO) कार्यालय से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि वे स्वयं इस मामले की जांच करेंगे और दोषी पाए जाने पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।


