Harsha Richhariya: प्रयागराज कुंभ से देशभर में सुर्खियों में आईं हर्षा रिछारिया ने सांसारिक मोह-माया का त्याग कर अध्यात्म की राह चुन ली है। धार्मिक नगरी उज्जैन के मौन तीर्थ में आयोजित एक समारोह के दौरान उन्होंने सन्यास जीवन में प्रवेश किया। हर्षा रिछारिया ने स्वामी सुमनानंद महाराज से गुरु दीक्षा ग्रहण कर सन्यास धर्म की शपथ ली।
हर्षा रिछारिया से हर्षानंद गिरी
दीक्षा ग्रहण करने के बाद हर्षा रिछारिया का नया नामकरण भी किया गया है। अब वे हर्षानंद गिरी के नाम से जानी जाएंगी। सन्यास की परंपराओं के अनुसार, उन्होंने अपने पुराने सांसारिक नाम और पहचान को पीछे छोड़कर लोक कल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया है।
समाज सेवा ही अब मुख्य लक्ष्य
सन्यास जीवन में प्रवेश के बाद हर्षानंद गिरी ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि संत जीवन का मुख्य उद्देश्य ईश्वर की भक्ति के साथ-साथ समाज का उत्थान करना है। उन्होंने बताया प्रयागराज कुंभ के दौरान अध्यात्म के प्रति उनका झुकाव बढ़ा था। अब वे पूरी तरह से सन्यासी मर्यादाओं का पालन करते हुए अपना जीवन दीन-दुखियों की सेवा और सामाजिक कार्यों में समर्पित करेंगी।
प्रयागराज कुंभ से मिली थी पहचान
बता दें कि हर्षा रिछारिया प्रयागराज कुंभ के दौरान चर्चा में आई थीं। उनके अचानक सन्यास लेने के फैसले ने उनके समर्थकों और परिचितों को चौंकाया जरूर है, लेकिन लोगों ने उनके इस कदम का स्वागत किया है।


