Tuesday, November 3, 2026
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नशे के 3 सौदागर गिरफ्तार, जबलपुर तक जुड़े हैं इनके कनेक्शन…

डिण्डौरी, जिले में नशे के अवैध कारोबार की जड़ें खोदने के लिए पुलिस प्रशासन ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना ली है। पुलिस मुख्यालय भोपाल के कड़े रुख के बाद, डिण्डौरी पुलिस ने एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए अंतर-जिला शराब तस्करी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। कोतवाली पुलिस की इस कार्रवाई में 77 लीटर से अधिक अंग्रेजी शराब के साथ तीन आरोपियों को दबोचा गया है, जिनसे पूछताछ में कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

​मुखबिर के जाल में फँसे तस्कर
​यह पूरी कार्रवाई 29 अप्रैल 2026 को पुलिस अधीक्षक वाहनी सिंह और एएसपी डॉ. अमित वर्मा के कुशल मार्गदर्शन में अंजाम दी गई। पुलिस को सटीक इनपुट मिला था कि आईटीआई डिण्डौरी के पास ‘भोंदूटोला’ में तस्करों की एक खेप शहर में खपाने के लिए तैयार खड़ी है। एसडीओपी सतीश द्विवेदी के निर्देश पर कोतवाली थाना प्रभारी दुर्गा प्रसाद नगपुरे ने तत्काल पुलिस बल के साथ इलाके की घेराबंदी की और घेरे में आए तीन आरोपियों को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया।

​कुंवर सिंह उर्फ भुरसू पाराशर (28): पुरानी डिण्डौरी का निवासी (17 आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड)।

​सचिन शर्मा (46): जबलपुर के घमापुर क्षेत्र का रहने वाला।
​सुनील कुशवाहा (43): शांतिनगर, गोहलपुर (जबलपुर) का निवासी।
​पुलिस ने आरोपियों के पास से तस्करी में प्रयुक्त सिल्वर रंग की i-10 कार (MP 20 CC 1776) बरामद की है। तलाशी के दौरान कार से अंग्रेजी शराब और भारी मात्रा में नगद राशि मिली।

अंग्रेजी शराब 77.390 लीटर (कीमत ₹36,770)
नगद राशि ₹52,000 (हार्ड कैश)
मोबाइल फोन 04 नग (कीमत ₹36,500)
वाहन (i-10 कार) कीमत लगभग ₹5,00,000
कुल मशरूका ₹6,25,270
​जांच में यह तथ्य सामने आया है कि पकड़े गए आरोपी महज मोहरे नहीं, बल्कि अपराध की दुनिया के पुराने खिलाड़ी हैं। आरोपी भुरसू पाराशर पर पहले से ही हत्या के प्रयास या चोरी जैसे 17 गंभीर मामले दर्ज हैं। वहीं, जबलपुर के दोनों आरोपी सचिन और सुनील भी पहले आबकारी एक्ट के तहत जेल की हवा खा चुके हैं। इनके पुराने रिकॉर्ड खंगालने से पता चलता है कि ये डिण्डौरी और जबलपुर के बीच एक संगठित नेटवर्क चला रहे थे।

​इस ऑपरेशन को सफल बनाने में कोतवाली प्रभारी निरीक्षक दुर्गा प्रसाद नगपुरे, उपनिरीक्षक भूपेंद्र पाठक, सउनि मनमोहन सिंह, प्रधान आरक्षक देवेन्द्र पटले, रोहित पटेल, आरक्षक श्याम तिवारी, विशाल पटेल, प्रवेश पटेल, रामसिंह अहिरवार और कैलाश द्विवेदी की पेशेवर कार्यशैली की सराहना की जा रही है।

​ डिण्डौरी पुलिस की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि जिले की सीमा के भीतर नशे का कारोबार करने वालों के लिए अब कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है। पुलिस अब इस सिंडिकेट के ‘मास्टरमाइंड’ की तलाश में जुटी है।डिण्डौरी, जिले में नशे के अवैध कारोबार की जड़ें खोदने के लिए पुलिस प्रशासन ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना ली है। पुलिस मुख्यालय भोपाल के कड़े रुख के बाद, डिण्डौरी पुलिस ने एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए अंतर-जिला शराब तस्करी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। कोतवाली पुलिस की इस कार्रवाई में 77 लीटर से अधिक अंग्रेजी शराब के साथ तीन आरोपियों को दबोचा गया है, जिनसे पूछताछ में कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

​मुखबिर के जाल में फँसे तस्कर
​यह पूरी कार्रवाई 29 अप्रैल 2026 को पुलिस अधीक्षक वाहनी सिंह और एएसपी डॉ. अमित वर्मा के कुशल मार्गदर्शन में अंजाम दी गई। पुलिस को सटीक इनपुट मिला था कि आईटीआई डिण्डौरी के पास ‘भोंदूटोला’ में तस्करों की एक खेप शहर में खपाने के लिए तैयार खड़ी है। एसडीओपी सतीश द्विवेदी के निर्देश पर कोतवाली थाना प्रभारी दुर्गा प्रसाद नगपुरे ने तत्काल पुलिस बल के साथ इलाके की घेराबंदी की और घेरे में आए तीन आरोपियों को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया।

​कुंवर सिंह उर्फ भुरसू पाराशर (28): पुरानी डिण्डौरी का निवासी (17 आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड)।

​सचिन शर्मा (46): जबलपुर के घमापुर क्षेत्र का रहने वाला।
​सुनील कुशवाहा (43): शांतिनगर, गोहलपुर (जबलपुर) का निवासी।
​पुलिस ने आरोपियों के पास से तस्करी में प्रयुक्त सिल्वर रंग की i-10 कार (MP 20 CC 1776) बरामद की है। तलाशी के दौरान कार से अंग्रेजी शराब और भारी मात्रा में नगद राशि मिली।

अंग्रेजी शराब 77.390 लीटर (कीमत ₹36,770)
नगद राशि ₹52,000 (हार्ड कैश)
मोबाइल फोन 04 नग (कीमत ₹36,500)
वाहन (i-10 कार) कीमत लगभग ₹5,00,000
कुल मशरूका ₹6,25,270
​जांच में यह तथ्य सामने आया है कि पकड़े गए आरोपी महज मोहरे नहीं, बल्कि अपराध की दुनिया के पुराने खिलाड़ी हैं। आरोपी भुरसू पाराशर पर पहले से ही हत्या के प्रयास या चोरी जैसे 17 गंभीर मामले दर्ज हैं। वहीं, जबलपुर के दोनों आरोपी सचिन और सुनील भी पहले आबकारी एक्ट के तहत जेल की हवा खा चुके हैं। इनके पुराने रिकॉर्ड खंगालने से पता चलता है कि ये डिण्डौरी और जबलपुर के बीच एक संगठित नेटवर्क चला रहे थे।

​इस ऑपरेशन को सफल बनाने में कोतवाली प्रभारी निरीक्षक दुर्गा प्रसाद नगपुरे, उपनिरीक्षक भूपेंद्र पाठक, सउनि मनमोहन सिंह, प्रधान आरक्षक देवेन्द्र पटले, रोहित पटेल, आरक्षक श्याम तिवारी, विशाल पटेल, प्रवेश पटेल, रामसिंह अहिरवार और कैलाश द्विवेदी की पेशेवर कार्यशैली की सराहना की जा रही है।

​ डिण्डौरी पुलिस की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि जिले की सीमा के भीतर नशे का कारोबार करने वालों के लिए अब कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है। पुलिस अब इस सिंडिकेट के ‘मास्टरमाइंड’ की तलाश में जुटी है।

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