women success story mp: डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडौरी जिले के बजाग विकासखंड के गांव पड़रिया डोंगरी की आरती बर्मन ने मेहनत और हौसले से अपनी जिंदगी बदल दी। जो महिला पहले महीने में 500 से 1000 रुपये की सिलाई करके मुश्किल से घर चलाती थी, आज वह हर महीने 12 से 15 हजार रुपये कमा रही हैं। साथ ही गांव की कई लड़कियों को रोजगार का रास्ता भी दिखा रही हैं।
पहले आरती दीदी घर पर ही थोड़ी-बहुत सिलाई करती थीं। आमदनी इतनी कम थी कि परिवार का खर्च चलाना मुश्किल था। उनका सपना था कि सिलाई का काम बढ़ाकर बड़ी दुकान खोलें, पर पैसे की कमी आड़े आ रही थी। इसी बीच गांव में चल रहे रेवा आजीविका स्वसहायता समूह के बारे में उन्हें पता चला। समूह से जुड़ने पर महिलाओं को अपना काम शुरू करने के लिए कर्ज मिलता है। आरती दीदी ने देर नहीं की और समूह की सदस्य बन गईं।
समूह से जुड़ने के बाद आरती दीदी को सीसीएल यानी कैश क्रेडिट लोन मिला। इस पैसे से उन्होंने एक सिलाई मशीन खरीदी और घर में ही सिलाई प्रशिक्षण केंद्र शुरू कर दिया। उन्होंने गांव की उन लड़कियों को सिलाई सिखाना शुरू किया जो बेरोजगार थीं और दूर-दराज से आती थीं। आज उनकी कई छात्राएं खुद सिलाई करके कमा रही हैं और अपने पैरों पर खड़ी हैं।
धीरे-धीरे काम बढ़ा तो आरती दीदी ने 5 सिलाई मशीनें और खरीद लीं। आमदनी बढ़ने पर उन्होंने घर के पास ही एक छोटी मनीहारी की दुकान भी खोल ली। इस दुकान में रोजमर्रा के सामान बेचकर उन्हें अलग से कमाई होने लगी।
आज उनकी कुल मासिक आय 12 हजार से 15 हजार रुपये तक पहुंच गई है। बेहतर कमाई से उन्होंने अपना पक्का मकान भी बनवा लिया है। परिवार की आर्थिक हालत अब पूरी तरह मजबूत हो चुकी है।
आरती बर्मन की कहानी बताती है कि अगर महिलाओं को सही जानकारी, थोड़ी आर्थिक मदद और मौका मिले, तो वे खुद भी आगे बढ़ सकती हैं और दूसरों को भी रास्ता दिखा सकती हैं। आज पड़रिया डोंगरी की महिलाएं आरती दीदी को देखकर स्वसहायता समूह से जुड़ रही हैं और अपने सपने पूरे करने में लगी हैं।
जिला प्रशासन का कहना है कि रेवा आजीविका मिशन के तहत हजारों महिलाओं को इसी तरह आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। आरती दीदी जैसी महिलाएं ही ग्रामीण भारत की असली ताकत हैं।
