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टाटा पावर और ड्रुक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन ने 5,000 मेगावाट स्वच्छ ऊर्जा क्षमता के विकास के लिए कौशल विकास इकोसिस्टम के निर्माण हेतु एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

~ इस रणनीतिक साझेदारी के तहत बड़े पैमाने पर स्वच्छ ऊर्जा परिसंपत्तियों के संचालन और रखरखाव का समर्थन करने के लिए एक भविष्य के लिए तैयार कार्यबल बनाने का लक्ष्य है ~

~ भूटान के माननीय प्रधान मंत्री, ल्योंछेन शेरिंग टोबगे ने थिम्पू में आयोजित समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर समारोह की शोभा बढ़ाई ~

~ प्रशिक्षण कार्यक्रम टाटा पावर स्किल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट के माध्यम से प्रदान किए जाएंगे ~

मुंबई : भारत की सबसे बड़ी एकीकृत बिजली कंपनियों में से एक, टाटा पावर, और भूटान की एकमात्र बिजली उत्पादन कंपनी, ड्रुक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन ने कौशलों को सिखाने और सुधारने का एक बड़ा ढांचा तैयार करने के लिए भूटान के थिम्पू में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

यह समझौता ज्ञापन एक व्यवस्थित ट्रेनिंग सिस्टम की नींव रखता है। इसका उद्देश्य एक ऐसा वर्कफोर्स तैयार करना है जो भविष्य की जरूरतों के लिए पूरी तरह तैयार हो। यह वर्कफोर्स दोनों कंपनियों की साझेदारी में बनने वाले क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए तुरंत और आगे आने वाले समय में काम आएगी।

समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर समारोह भूटान के माननीय प्रधान मंत्री, ल्योंछेन शेरिंग टोबगे की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस समझौता ज्ञापन पर टाटा पावर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक, डॉ. प्रवीर सिन्हा और डीजीपीसी के प्रबंध निदेशक, दाशो छेरिंग रिनजिन द्वारा औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए गए। समारोह में टाटा पावर की प्रेसिडेंट- जनरेशन, सुश्री अंजली पांडे के साथ-साथ टाटा पावर, डीजीपीसी और संबंधित संस्थानों के अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

यह ट्रेनिंग प्रोग्राम ‘टाटा पावर स्किल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट’ के जरिए दिए जाएंगे। यह संस्थान बिजली क्षेत्र में ट्रेनिंग देने के अपने खास अनुभव और महारत का इस्तेमाल करेगा।

टाटा पावर के सीईओ और प्रबंध निदेशक डॉ. प्रवीर सिन्हा ने कहा, डीजीपीसी के साथ यह साझेदारी भूटान के तेज़ी से बढ़ते स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक भविष्य के लिए तैयार टैलेंट इकोसिस्टम बनाने के हमारे साझा दृष्टिकोण को दर्शाती है। पावर सेक्टर की ट्रेनिंग में अपने बेहतरीन ट्रैक रिकॉर्ड का इस्तेमाल करते हुए, टाटा पावर स्किल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऐसे प्रोफेशनल्स तैयार करेगा जो सुरक्षित संचालन, नई तकनीकों और ऑपरेशंस व मेंटेनेंस में पूरी तरह निपुण होंगे।”

टाटा पावर कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए टीपीएसडीआई के माध्यम से तकनीकी विशेषज्ञता, प्रशिक्षण बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर), पाठ्यसामग्री (कोर्सवेयर) और मान्यता (एक्रिडिटेशन) सहायता प्रदान करेगा। वहीं, डीजीपीसी इस समझौता ज्ञापन और इसके बाद होने वाले अंतिम समझौतों के तहत सुचारू क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए, प्रशिक्षार्थियों को जुटाने और उनकी तैनाती की व्यवस्था करेगा।

भूटान सरकार और वहां के संबंधित अथॉरिटीज़ से सभी जरूरी मंजूरियां लेने की जिम्मेदारी डीजीपीसी की होगी, जबकि टाटा पावर भारत सरकार से आवश्यक मंजूरियां प्राप्त करेगी।

डीजीपीसी के प्रबंध निदेशक दाशो छेरिंग रिनजिन ने कहा, यह समझौता ज्ञापन 5,000 मेगावाट स्वच्छ ऊर्जा क्षमता विकसित करने की हमारी मौजूदा साझेदारी के तहत आवश्यक स्थानीय क्षमताओं को मज़बूत करने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है। डीजीपीसी प्रशिक्षण की ज़रूरतों की पहचान करने, आवश्यकतानुसार प्रशिक्षार्थियों को जुटाने के लिए भूटान के संबंधित प्राधिकरणों और हितधारकों के साथ मिलकर काम करेगी। साथ ही यह सुनिश्चित करेगी कि यह कार्यक्रम राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का समर्थन करे और भूटान की शाही सरकार के व्यापक कार्यबल विकास प्रयासों को पूरक बनाए।”

इस समझौता ज्ञापन के तहत प्रस्तावित कौशल विकास पहलों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा:

चरण 1: साइट पर प्रवेश करने से पहले कार्यबल की तत्परता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सुरक्षा प्रशिक्षण (सेफ्टी ट्रेनिंग) पर ध्यान केंद्रित करना, जिसमें परियोजना श्रमिकों के लिए अनिवार्य सेफ्टी इंडक्शन कार्यक्रम शामिल हैं।

चरण 2: तकनीकी कौशल विकास का विस्तार करना जिसमें निर्माण (कंस्ट्रक्शन), सामग्री प्रबंधन (मटीरियल हैंडलिंग), और मिट्टी हटाने वाले उपकरणों (अर्थ-मूविंग इक्विपमेंट) का संचालन शामिल है, जो परियोजना निर्माण की आवश्यकताओं के अनुरूप होगा।

चरण 3: स्वच्छ ऊर्जा संपत्तियों के दीर्घकालिक संचालन और रखरखाव (ऑपरेशंस एंड मेंटेनेंस) के लिए विशेष क्षमताओं का विकास किया जाएगा।

टाटा पावर स्किल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट की स्थापना बिजली क्षेत्र में कौशल की कमी को दूर करने के लिए की गई थी। यह संस्थान उद्योग की जरूरतों के मुताबिक मॉड्यूल-आधारित ट्रेनिंग और सर्टिफिकेट प्रोग्राम चलाता है। सुरक्षा प्रशिक्षण देने, मूल्यांकन करने और संयुक्त प्रमाणपत्र जारी करने के लिए टीपीएसडीआई को ‘नेशनल सेफ्टी काउंसिल ऑफ इंडिया’ से मान्यता मिली हुई है। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के एक स्वीकृत ट्रेनिंग पार्टनर और ‘नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग’ द्वारा मान्यता प्राप्त ‘डुअल अवार्डिंग बॉडी’ के रूप में, टीपीएसडीआई पूरे भारत में एक मजबूत ट्रेनिंग नेटवर्क चलाता है। यह संस्थान बिजली क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन में व्यावहारिक ट्रेनिंग देता है, जिसमें थर्मल, हाइड्रो (जल विद्युत), और सौर, पवन व ग्रीन हाइड्रोजन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा तकनीकें शामिल हैं।

यह समझौता ज्ञापन भूटान के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक कौशल तैयार करने के एक सहयोगात्मक और व्यावहारिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। इसमें डीजीपीसी भूटान के संबंधित अथॉरिटीज़ के साथ मिलकर काम करेगी और टाटा पावर तकनीकी प्रशिक्षण सहायता प्रदान करेगी।

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