सौरभ श्रीवास्तव संवाददाता
*जल जीवन मिशन की पाइपलाइन तोड़ने वाले ठेकेदार पर FIR के आदेश, लापरवाह अधिकारियों पर भी गिरी गाज*
कटनी जिले की समय-सीमा बैठक इस बार सिर्फ समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि कलेक्टर आशीष तिवारी ने अफसरों और ठेकेदारों की लापरवाही पर सख्त तेवर दिखाते हुए साफ संदेश दे दिया कि जनता के काम में बाधा डालने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा।बहोरीबंद के ग्राम बरतरा-बरतरी में जल जीवन मिशन के तहत बिछाई गई पाइपलाइन को खुदाई के दौरान क्षतिग्रस्त करने के मामले में कलेक्टर ने बीएसएनएल के ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बिना समन्वय के खुदाई की अनुमति किसने दी और करोड़ों की योजना को नुकसान पहुंचाने की जिम्मेदारी कौन लेगा?सीमांकन मामलों में सुस्ती, नायब तहसीलदारों पर जुर्माने की तैयारीलोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत समय-सीमा में काम पूरा नहीं करने वाले राजस्व अधिकारियों पर भी कलेक्टर का गुस्सा फूटा। सीमांकन प्रकरणों को लटकाने पर सिंगौड़ी और देवराकला के नायब तहसीलदारों पर जुर्माना लगाने के निर्देश दिए गए। इससे साफ है कि आम जनता को महीनों चक्कर कटवाने वाले अधिकारियों पर अब कार्रवाई की तलवार लटकने लगी है।सीएम हेल्पलाइन बनी अधिकारियों की कमजोरीबैठक में कई विभागों की लंबित शिकायतों का ढेर सामने आया। जल संसाधन, पीडब्ल्यूडी, शिक्षा, स्वास्थ्य, नगरीय निकाय, वन, कृषि और खनिज विभाग जैसी महत्वपूर्ण शाखाओं में शिकायतों के निराकरण की रफ्तार बेहद धीमी पाई गई। कलेक्टर ने साफ कहा कि शिकायतें दबाने नहीं, निपटाने के लिए होती हैं।आयुष्मान कार्ड की धीमी रफ्तार पर भी नाराजगीजिले में 12 से 14 मई के बीच केवल 381 नए आयुष्मान कार्ड बनाए जाने पर भी कलेक्टर ने नाराजगी जताई। सवाल यह है कि करोड़ों के प्रचार के बावजूद गरीबों तक स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ आखिर इतनी धीमी गति से क्यों पहुंच रहा है?जनगणना और फार्मर आईडी में भी सुस्तीजनगणना 2027 के मकान सूचीकरण कार्य और फार्मर आईडी रजिस्ट्रेशन की धीमी प्रगति पर भी अधिकारियों को फटकार मिली। कलेक्टर ने साफ निर्देश दिए कि फील्ड में उतरकर काम की निगरानी करें, सिर्फ बैठकों में आंकड़े पेश करने से काम नहीं चलेगा।बैठक में मौजूद रहे कई बड़े अधिकारीबैठक में जिला पंचायत सीईओ हरसिमरनप्रीत कौर, अपर कलेक्टर नीलांबर मिश्रा सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे, लेकिन सवाल यही है कि जब समस्याएं लगातार बढ़ रही थीं तो जिम्मेदार विभाग अब तक चुप क्यों बैठे थे?


