Tuesday, November 3, 2026
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Datia By-Election: दतिया से कांग्रेस पूर्व विधायक राजेन्द्र भारती का बेटा लड़ेगा उपचुनाव?

Datia By-Election: मध्य प्रदेश की हाई-प्रोफाइल दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की आहट के बीच कांग्रेस खेमे से एक बड़ी खबर आ रही है। बैंक धोखाधड़ी मामले में सजा मिलने के बाद अपनी विधायकी गंवा चुके राजेंद्र भारती अचानक अपने बेटे अंकित भारती को लेकर दिल्ली पहुंच गए हैं। राजनीतिक गलियारों में इस दौरे को दतिया सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।

राहुल-खड़गे से मुलाकात

सूत्रों के मुताबिक, नई दिल्ली पहुंचे राजेंद्र भारती ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की है। भारती ने सबसे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी और फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान राजेंद्र भारती के साथ उनके बेटे अंकित भी मौजूद रहे। सियासी जानकारों का कहना है कि भारती की कोशिश है कि यदि कानूनी पेचीदगियों के कारण वे खुद चुनाव नहीं लड़ पाते हैं, तो उनके स्थान पर बेटे अंकित को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया जाए ताकि दतिया की विधायकी उनके घर में ही रहे।

26 मई को होगा फैसला!

भले ही राजेंद्र भारती दिल्ली में लॉबिंग कर रहे हों और सार्वजनिक रूप से यह दावा कर रहे हों कि यह एक सामान्य मुलाकात थी और उनकी सदस्यता बच जाएगी, लेकिन कानूनी हकीकत काफी कठिन है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें बैंक फ्रॉड केस में 3 साल की सजा सुनाई है, जिसके चलते विधानसभा सचिवालय उनकी सदस्यता शून्य घोषित कर चुका है। इस फैसले के खिलाफ राजेंद्र भारती ने हाई कोर्ट में अपील की है, जहां आगामी 26 मई को अर्जेंट हियरिंग होनी है। हालांकि, कोर्ट द्वारा साक्ष्यों के आधार पर दी गई सजा को देखते हुए उन्हें फौरी राहत मिलने की उम्मीदें काफी कम मानी जा रही हैं।

टिकट के लिए कांग्रेस में खींचतान

राजेंद्र भारती को इस बात का भली-भांति अहसास है कि निर्वाचन आयोग कभी भी दतिया में उपचुनाव की तारीखों का एलान कर सकता है। यही वजह है कि उन्होंने प्लान-बी पर काम करना शुरू कर दिया है। हालांकि, राजेंद्र भारती की इस राह में मुश्किलें कम नहीं हैं। दतिया से कांग्रेस के कई मजबूत दावेदार भी प्रदेश अध्यक्ष के बंगले पर दस्तक दे रहे हैं। अन्य दावेदारों का तर्क है कि टिकट परिवारवाद के आधार पर नहीं बल्कि सर्वे और जमीनी पकड़ के आधार पर दिया जाना चाहिए। अब देखना होगा कि 26 मई की अदालती कार्यवाही और दिल्ली दरबार की इस दौड़ का दतिया की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

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