Wednesday, November 4, 2026
Homeमध्यप्रदेशग्वालियरScindia VS KP: महाराज बनाम केपी यादव पार्ट-2! तंज और नोटिस-इस्तीफों का...

Scindia VS KP: महाराज बनाम केपी यादव पार्ट-2! तंज और नोटिस-इस्तीफों का दौर

Scindia VS KP: मध्यप्रदेश के गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के दो दिग्गज नेताओं के बीच की पुरानी अदावत एक बार फिर सतह पर आ गई है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व सांसद डॉ. केपी यादव के समर्थकों के बीच अंचल में अपना-अपना दबदबा कायम करने की रेस अब आक्रामक हो चुकी है। हालात ये हैं कि सोशल मीडिया पर जारी गुटीय जंग पार्टी के अनुशासन के दायरों को लांघ चुकी है, जिसके बाद संगठन को दोनों पक्षों पर हंटर चलाना पड़ा है।

केपी यादव का कमबैक

राजनीतिक पंडितों की मानें तो ठंडी पड़ चुकी इस सियासी आग में घी डालने का काम हाल ही में हुए निगम-मंडलों के विस्तार ने किया है। मध्य प्रदेश सरकार ने पूर्व सांसद केपी यादव को राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री दर्जा नियुक्त किया है। संगठन से इस बड़े सम्मान के मिलने के बाद केपी यादव का खेमा बेहद उत्साहित हो गया और उन्होंने क्षेत्र में अपने नेता की ताकत का प्रदर्शन शुरू कर दिया, जो सिंधिया समर्थकों को नागवार गुजरा।

मर्यादाएं तार-तार

पद मिलते ही दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच फेसबुक, व्हाट्सएप और X पर जुबानी तीर चलने लगे। दोनों तरफ से एक-दूसरे के नेताओं के रसूख को छोटा दिखाने के लिए बालक बुद्धि और अहंकारी जैसे विवादित शब्दों के साथ तीखे तंज कसे गए। सोशल मीडिया पर पार्टी की किरकिरी होते देख भाजपा की स्थानीय इकाई ने दोनों खेमों के कई नेताओं को कारण बताओ नोटिस थमा दिए हैं। इस अंदरूनी कलह और नोटिसबाजी के चलते पिछले दिनों पिछड़ा वर्ग मोर्चा के एक बड़े पदाधिकारी का इस्तीफा भी सामने आ चुका है, जिससे साफ है कि यह रार जल्द शांत होने वाली नहीं है।

साल 2019 का वो चुनावी घाव…

इस हाई-प्रोफाइल सियासी टकराव की नींव आज से सात साल पहले साल 2019 के लोकसभा चुनाव में पड़ी थी। तब ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस में थे और केपी यादव भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। कभी सिंधिया के बेहद खास सिपहसालार रहे केपी यादव ने गुना सीट पर खुद महाराज को एक लाख से अधिक वोटों से हराकर पूरे देश में सनसनी फैला दी थी। साल 2020 में सिंधिया के भाजपा में आने और 2024 में दोबारा गुना से सांसद बनने के बाद भी दोनों नेताओं के बीच की यह वैचारिक और जमीनी दूरी कभी कम नहीं हो सकी। 2019 की वही हार-जीत आज भी अंचल में वर्चस्व और दबदबा साबित करने की सबसे बड़ी वजह बनी हुई है।

दिलचस्प बात यह है कि सोशल मीडिया पर समर्थकों के बीच चल रहे इस घमासान और नोटिसों की झड़ी पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया या केपी यादव की ओर से अब तक कोई बयान सामने नहीं आया है। दोनों शीर्ष नेता फिलहाल इस पूरे विवाद पर मौन साधे हुए हैं, लेकिन नीचे जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच तलवारें खिंची हुई हैं।

सम्बंधित ख़बरें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

लेटेस्ट