Masoor Kharidi MP: डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडौरी, रबी सीजन 2026-27 में किसानों से चना और मसूर खरीदने का काम कर रहे निगवानी खरीदी केंद्र में बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां किसानों की मसूर को बिना जांच-पड़ताल के ही सरकारी बारदानों में भर दिया गया। इस मामले में जिला कलेक्टर ने बी-पेक्स डिंडौरी के प्रबंधक रघुवर सिंह गौतम को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
19 मई 2026 को कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी आकाश तुरकर ने निगवानी के एमपीडब्ल्यूएलसी गोदाम का अचानक निरीक्षण किया। जांच में पता चला कि केंद्र पर किसानों से ली जा रही मसूर की न तो सफाई हो रही थी, न ही छंटाई। कचरा, सिकुड़े हुए दाने और तेवड़ा मिली मसूर को सीधे सरकारी बोरों में भरकर रखा जा रहा था।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को कई जगह गड़बड़ी मिली,
गोदाम नंबर 19: यहां पिछले सालों की खरीदी गई 5 बोरी मसूर जिसमें घुन लगी हुई मिली। साथ ही 250 बोरियों में भरी नई मसूर भी खराब क्वालिटी की निकली। गोदाम नंबर 18 – यहां 1200 बोरियों में भरी 600 क्विंटल मसूर इतनी खराब थी कि वेयरहाउस के कर्मचारियों को खुद उसे अलग रखना पड़ा। जांच के दौरान कुल 725 क्विंटल मसूर तय मानकों पर खरी नहीं उतरी।
सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को हुई। गोदाम नंबर 18 और 19 में कुल 8200 क्विंटल मसूर रखी थी, लेकिन उसका सिर्फ 3560.5 क्विंटल का ही ‘”ट्रांसपोर्ट चालान” काटा गया। बाकी माल का कागज ही नहीं बना, इस वजह से किसानों को पैसा मिलने में देर हो रही है।
कलेक्टर ने नोटिस में कहा है कि केंद्र प्रभारी ने सरकारी खरीदी के नियम 7, 8.7 और 10(3)(5), 10(3)(7) को तोड़ा है, नोटिस में पूछा गया है कि- क्यों न बी-पेक्स डिंडौरी समिति को काली सूची में डाल दिया जाए? लापरवाही करने वाले अफसरों-कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई क्यों न की जाए?
प्रबंधक रघुवर सिंह गौतम को नोटिस मिलने के 3 दिन के अंदर अपना लिखित जवाब देना होगा। जवाब नहीं देने या संतोषजनक जवाब न मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि
सरकारी खरीदी में खराब माल जाने से सरकार को नुकसान होता है और गोदाम में रखने पर और खराब होकर बर्बाद हो जाता है। साथ ही, कागजी कार्रवाई पूरी न होने से किसानों का भुगतान महीनों लटक जाता है। प्रशासन अब पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है।
