घंसौर जिला सिवनी/खबर डिजिटल/ मनोज नामदेव/ सिवनी जिले से लगभग 150 किलोमीटर दूर घंसौर तहसील के अंतर्गत आने वाला पौड़ी गांव आज उस वैश्विक जल संकट की भयावह तस्वीर बन चुका है, जिसकी चेतावनी दुनिया भर की संस्थाएं वर्षों से देती रही हैं।
भीषण गर्मी के बीच गांव के लोग रात 2 बजे से ही एक बाल्टी पानी के लिए लाइन में लगने को मजबूर हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि रोज एक युवक अपनी जान जोखिम में डालकर गहरे कुएं में उतरता है और डब्बे से पानी भरकर ऊपर खड़े ग्रामीणों तक पहुंचाता है। कुएं का गंदा और असुरक्षित पानी ही अब गांव की प्यास बुझाने का एकमात्र सहारा बन गया है।
पानी खत्म होते ही ग्रामीणों का इंतजार फिर शुरू हो जाता है और यही दर्दनाक प्रक्रिया पूरे दिन चलती रहती है।
विडंबना यह है कि गांव में सरकार की “नल-जल योजना” मौजूद होने के बावजूद भीषण गर्मी के सामने यह व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि गांव से मात्र 5 किलोमीटर दूर बहने वाली नर्मदा का पानी आज भी इन ग्रामीणों तक क्यों नहीं पहुंच पाया।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार क्षेत्र के सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते से नर्मदा नदी से गांव तक जल आपूर्ति की मांग की, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन और भाषण मिले। वहीं क्षेत्रीय विधायक योगेंद्र सिंह बाबा पर भी ग्रामीणों ने केवल वादे करने का आरोप लगाया है।
जब इस गंभीर मामले पर प्रशासन से सवाल किए गए तो तहसीलदार ने स्वीकार किया कि पौड़ी सहित आसपास के कई गांव जल संकट से जूझ रहे हैं। प्रशासन को सूचना मिली है कि ग्रामीण कुएं में उतरकर पानी भरने को मजबूर हैं, जिसके बाद ग्राम पंचायत और पुलिस विभाग को निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है- जब सरकारें करोड़ों रुपये की जल योजनाओं का दावा करती हैं, तब आखिर क्यों एक गांव के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए अपनी जान जोखिम में डालने पर मजबूर हैं?
पौड़ी गांव की यह तस्वीर केवल एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि उस वैश्विक जल संकट की चेतावनी है, जहां विकास के दावों के बीच इंसान आज भी पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए संघर्ष कर रहा है।
