राज्यसभा की 26 सीटों के लिए 18 जून को मतदान प्रस्तावित है, जिसमें मध्य प्रदेश की तीन सीटें भी शामिल हैं. इन सीटों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और भाजपा व कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने समीकरण साधने में जुटी हुई हैं. वर्तमान में भाजपा के हिस्से की दो सीटों पर केंद्रीय राज्यमंत्री जॉर्ज कुरियन और डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी सांसद हैं, जबकि कांग्रेस की ओर से दिग्विजय सिंह राज्यसभा में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.
राज्यसभा जाने के लिए कई नेता पहुंचे दिल्ली
भाजपा के भीतर संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है. पार्टी अनुसूचित जाति वर्ग में अपने जनाधार को और मजबूत करने के लिए नए विकल्पों पर विचार कर रही है. इसी कड़ी में अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य का नाम प्रमुख दावेदारों में सामने आ रहा है. माना जा रहा है कि संगठन में उनका मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. ऐसे में राज्यसभा भेजना भी एक संभावित विकल्प माना जा रहा है.
इन नेताओं को राज्यसभा जाने की चूल
सूत्रों के अनुसार, लाल सिंह आर्य ने हाल ही में दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर अपनी राजनीतिक भूमिका और संभावनाओं पर चर्चा की है. इससे उनके नाम को लेकर अटकलों को और बल मिला है. भाजपा सामाजिक और जातीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों के चयन पर विचार कर रही है. दूसरी ओर, राज्यसभा टिकट की दौड़ में कई वरिष्ठ नेताओं के नाम भी चर्चा में बने हुए हैं. पिछले कुछ दिनों के दौरान आधा दर्जन से अधिक नेता दिल्ली पहुंच चुके हैं और उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व, वरिष्ठ मंत्रियों तथा संघ से जुड़े पदाधिकारियों से मुलाकात की है. इनमें पूर्व मंत्री रामपाल सिंह, अरविंद भदौरिया, नरोत्तम मिश्रा और कैलाश विजयवर्गीय जैसे अनुभवी नेताओं के नाम शामिल हैं.
नेताओं ने कही ये बात
इन नेताओं का मानना है कि यदि उन्हें राज्यसभा में अवसर मिलता है तो पार्टी को आने वाले नगरीय निकाय चुनाव, पंचायत चुनाव और विधानसभा चुनावों में राजनीतिक फायदा मिल सकता है. इसी वजह से सभी नेता अपने क्षेत्रीय प्रभाव, सामाजिक आधार और संगठनात्मक अनुभव को आधार बनाकर दावेदारी पेश कर रहे हैं. वहीं डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी भी भाजपा के प्रमुख आदिवासी चेहरों में गिने जाते हैं. बड़वानी जिले से आने वाले सोलंकी लंबे समय से आदिवासी क्षेत्रों में सक्रिय हैं और संघ के विभिन्न कार्यों से जुड़े रहे हैं. आदिवासी समाज में उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए उन्हें भी पार्टी की रणनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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