जून महीने की शुरुआत के साथ ही गैस उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है. केंद्र सरकार ने एलपीजी और पीएनजी उपयोगकर्ताओं को लेकर नए दिशा-निर्देश लागू किए हैं, जिनका असर लाखों उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है. नए नियम के तहत उन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष ध्यान देना होगा जहां पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG की सुविधा उपलब्ध है.
PNG कनेक्शन मिलते ही 30 दिनों के अंदर करना होगा ये काम
सरकार के नए प्रावधानों के अनुसार यदि कोई उपभोक्ता नया PNG कनेक्शन लेता है, तो उसे 30 दिनों के भीतर अपना LPG कनेक्शन सरेंडर करना होगा. ऐसा नहीं करने पर संबंधित एलपीजी कनेक्शन को निष्क्रिय या रद्द किया जा सकता है. इस कदम का उद्देश्य गैस वितरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना बताया जा रहा है.
PNG और LPG दोनों कनेक्शन नहीं रख सकते लोग
सरकार का मानना है कि जिन इलाकों में PNG नेटवर्क पहले से उपलब्ध है, वहां एक ही परिवार द्वारा PNG और LPG दोनों कनेक्शन बनाए रखना आवश्यक नहीं है. इसी सोच के तहत “एक घर, एक गैस कनेक्शन” की व्यवस्था को प्रोत्साहित किया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि इससे गैस आपूर्ति व्यवस्था अधिक व्यवस्थित होगी और जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक संसाधनों की बेहतर पहुंच सुनिश्चित की जा सकेगी.
तेल विपणन कंपनियां भी नई व्यवस्था लागू करेगी
उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तेल विपणन कंपनियां भी नई व्यवस्था लागू करने जा रही हैं. इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस जैसी कंपनियां कनेक्शन ट्रांसफर वाउचर सिस्टम शुरू करेंगी. इस प्रणाली के जरिए उपभोक्ता अपना एलपीजी कनेक्शन आसानी से सरेंडर कर सकेंगे. यदि भविष्य में किसी कारणवश उन्हें दोबारा एलपीजी की आवश्यकता होती है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत कनेक्शन को पुनः सक्रिय भी कराया जा सकेगा.
एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी
इस बीच जून के पहले दिन गैस उपभोक्ताओं को एक और बदलाव का सामना करना पड़ा. तेल कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की है. हालांकि राहत की बात यह है कि घरेलू उपयोग में आने वाले 14.2 किलोग्राम वाले रसोई गैस सिलेंडर के दामों में फिलहाल कोई संशोधन नहीं किया गया है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार देशभर में PNG कनेक्शनों की संख्या लगातार बढ़ रही है. इसके बावजूद बड़ी संख्या में उपभोक्ता LPG कनेक्शन भी बनाए हुए हैं. ऐसे में गैस संसाधनों के संतुलित उपयोग, बेहतर प्रबंधन और वितरण प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए यह नया नियम लागू किया गया है. आने वाले समय में इस व्यवस्था से गैस आपूर्ति को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने की उम्मीद की जा रही है.
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