मध्यप्रदेश सरकार ने पुलिस विभाग में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक बदलाव करते हुए कई अधिकारियों के तबादले किए हैं. गृह विभाग द्वारा जारी आदेश में 8 आईपीएस अधिकारियों और 66 राज्य पुलिस सेवा अधिकारियों को नई पदस्थापनाएं दी गई हैं. इस सूची में शिवपुरी जिले के करैरा में पदस्थ रहे आईपीएस अधिकारी आयुष जाखड़ का नाम भी शामिल है. उन्हें अब जबलपुर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर नियुक्त किया गया है. वहीं ग्वालियर में एएसपी के रूप में कार्यरत अनु बेनिवाल को भी जबलपुर भेजा गया है.
प्रीतम लोधी से जुड़े विवाद के कारण आयुष जाखड़ का तबादला
आयुष जाखड़ का तबादला इसलिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि कुछ महीने पहले उनका नाम भाजपा विधायक प्रीतम लोधी से जुड़े विवाद के कारण सुर्खियों में आया था. उस समय वे शिवपुरी जिले में एसडीओपी के पद पर कार्यरत थे. अप्रैल में एक सड़क हादसे के मामले में विधायक के बेटे के खिलाफ कार्रवाई के बाद यह विवाद सामने आया था. घटना के अनुसार विधायक प्रीतम लोधी के पुत्र दिनेश लोधी पर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने का आरोप लगा था. बताया गया कि उनकी थार गाड़ी की टक्कर से पांच लोग घायल हुए थे. घटना के बाद एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें दिनेश लोधी घायलों से बातचीत करते दिखाई दिए थे. वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी.
क्या था मामला
जांच के दौरान एसडीओपी आयुष जाखड़ ने दिनेश लोधी को पूछताछ के लिए थाने बुलाया था. साथ ही वाहन पर नियमों के विपरीत लगे हूटर, विधायक नेम प्लेट और काली फिल्म को लेकर चालानी कार्रवाई भी की गई थी. इसी कार्रवाई के बाद मामला राजनीतिक रंग लेता नजर आया. इसके बाद विधायक प्रीतम लोधी के कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए थे. इन वीडियो में उन्होंने पुलिस अधिकारियों को लेकर तीखी टिप्पणियां की थीं. उनके बयानों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा शुरू हो गई थी. मामले ने तब और तूल पकड़ा जब आईपीएस एसोसिएशन ने इस संबंध में आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की मांग की थी. बाद में भाजपा संगठन ने भी विधायक को नोटिस जारी किया था. काफी समय तक चर्चा में रहने के बाद यह विवाद धीरे-धीरे शांत हो गया था. अब राज्य सरकार द्वारा जारी तबादला सूची में आयुष जाखड़ को जबलपुर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद उनका नाम एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. पुलिस विभाग में हुए इस व्यापक फेरबदल को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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